वोटर लिस्ट से नाम हटाने-जोड़ने के लिए अब आधार वेरिफिकेशन जरूरी होगा। इसके लिए चुनाव आयोग (EC) ने अपने पोर्टल और एप पर एक नया ‘ई-साइन’ फीचर शुरू किया है।
यह दावा अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में किया गया है। इसके मुताबिक 23 सितंबर से पहले आधार वेरिफिकेशन जरूरी नहीं था।
पहले चुनाव आयोग के एप और पोर्टल पर फॉर्म भरने के लिए लोग सिर्फ अपना मोबाइल नंबर और वोटर आईडी (EPIC) नंबर डालकर आवेदन कर सकते थे। उस समय यह जांच नहीं होती थी कि दी गई जानकारी सच में उसी व्यक्ति की है या नहीं।
अब ECINet पोर्टल पर एक नया फीचर दिखाई दे रहा है, जिससे जानकारी की पुष्टि करना जरूरी हो गया है। हालांकि चुनाव आयोग ने इस बदलाव की अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
पोर्टल पर नए वोटर के रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म 6, वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने/हटाने के प्रस्ताव पर आपत्ति के लिए फॉर्म 7 और सुधार के लिए फॉर्म 8 भरने वाले आवेदक को अब पहचान वेरिफाई करानी होगी।
इसके जरिए चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जिस वोटर आईडी कार्ड के लिए आवेदक आवेदन कर रहे हैं, उसमें उनका नाम उनके आधार कार्ड पर दिए नाम के समान ही हो। आवेदक जिस मोबाइल नंबर का उपयोग कर रहे हैं, वह भी आधार से जुड़ा हो।
दरअसल, राहुल गांधी कई बार आरोप लगा चुके हैं कि वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी, वोटों का अवैध जोड़-घटाव और संस्थानों का दुरुपयोग कर चुनाव जीते गए। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस ने महादेवपुरा और आलंद जैसे इलाकों में इसके उदाहरण भी सामने रखे हैं और आने वाले समय में और भी सबूत जनता को दिखाए जाएंगे।
राहुल ने 20 सितंबर को कहा था- ‘वह जल्द ही ऐसा सबूत सामने लाने वाले हैं जिससे साबित हो जाएगा कि नरेंद्र मोदी और बीजेपी ने वोट चोरी कर चुनाव जीते।’ राहुल ने इसे “हाइड्रोजन बम” करार दिया और कहा कि उनके पास खुले-और-बंद सबूत हैं।

