दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (9 मार्च) को दिल्ली शराब नीति केस में पूर्व CM अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की CBI अधिकारियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दी।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) मामले में ट्रायल कोर्ट आगे की सुनवाई तब तक टाल दे, जब तक हाईकोर्ट इस मामले पर आगे सुनवाई न कर ले।
ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को इस मामले में सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। इसी आदेश को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
CBI ने अपनी 974 पेज की याचिका में कहा है कि ट्रायल कोर्ट ने चार्ज फ्रेमिंग के चरण में ही मिनी-ट्रायल जैसा व्यवहार किया। कोर्ट ने पूरे सबूतों को विस्तार से जांचना शुरू कर दिया, जैसे कि पूरा केस चल रहा हो। जबकि इस स्तर पर केवल सरसरी नजर से मामला देखा जाता है।
वहीं इस मामले पर AAP नेता प्रियंका कक्कड़ ने कहा, केजरीवाल पर सभी आरोप बेबुनियाद और मनगढ़ंत थे। पीएम मोदी और अमित शाह को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। भाजपा CBI और ED की ताकतों का गलत इस्तेमाल कर रही है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एजेंसी फिलहाल डिस्चार्ज आदेश पर रोक नहीं चाहती, लेकिन यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच को प्रभावित न करे।
हाईकोर्ट ने एक्साइज पॉलिसी केस की जांच करने वाले CBI ऑफिसर के खिलाफ डिपार्टमेंटल एक्शन लेने के ट्रायल कोर्ट के ऑर्डर पर रोक लगा दी है।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को मामले में आरोपी बनाए गए दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिय समेत 23 लोगों को बरी कर दिया था।
फैसला आने के 6 घंटे के बाद ही CBI ने इसके खिलाफ हाइकोर्ट में अपील कर दी थी। CBI ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट से इसे रद्द करने की मांग की है।
वहीं, बरी होने के बाद कोर्ट से बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल भावुक हो गए। उन्होंने कहा- मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है। आज ये साबित हो गया कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी कट्टर ईमानदार हैं।


