प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। ED का आरोप है कि गुरुवार को पॉलिटिकल कंसलटेंट फर्म (I-PAC) के ऑफिस और उनके डायरेक्टर के घर हुई तलाशी के दौरान राज्य सरकार की ओर से रुकावट डाली गई। ED ने मामले की CBI जांच की मांग की है।
इधर, पश्चिम बंगाल सरकार ने भी शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में केविएट दाखिल की है। सरकार ने मांग की है कि उसका पक्ष सुने बिना कोई आदेश पारित न किया जाए।
इससे पहले शुक्रवार को ED ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया था, लेकिन कोर्टरूम में हंगामे के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई 14 जनवरी के लिए टाल दी थी।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता में पैदल मार्च भी निकाला। इसके बाद ईडी पर दो FIR भी दर्ज कराई। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह और नेता प्रितपक्ष सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ बयान दिए थे।
इसके बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी को मानहानि का नोटिस भेजा है। नोटिस में उन्होंने 72 घंटे के भीतर कथित आरोपों से जुड़े सभी सबूत पेश करने की मांग की है।
8 जनवरी को ED की टीम ने प्रतीक जैन के कोलकाता के गुलाउडन स्ट्रीट स्थित घर और दूसरी टीम सॉल्टलेक स्थित दफ्तर पर छापा मारा था। प्रतीक जैन ही ममता बनर्जी के लिए पॉलिटिकल स्ट्रैटजी तैयार करते हैं।
कार्रवाई सुबह 6 बजे से शुरू हुई थी, लेकिन करीब 11:30 बजे के बाद मामला बढ़ा। सबसे पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर, प्रतीक के आवास पर पहुंचे।
कुछ समय बाद सीएम ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके घर पहुंच गईं। ममता वहां कुछ देर रुकीं। जब बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी। इसके बाद वे I-PAC के ऑफिस भी गईं। उन्होंने कहा- गृहमंत्री मेरी पार्टी के दस्तावेज उठवा रहे हैं। ED ने कहा कि पश्चिम बंगाल में 6 और दिल्ली में 4 ठिकानों पर छापेमारी की गई।

