तमिलनाडु के करूर में भगदड़ के 2 दिन बाद एक्टर विजय थलपति ने मंगलवार को कहा, “क्या CM स्टालिन बदला लेने की कोशिश कर रहे हैं। हमने कुछ गलत नहीं किया। अगर बदला लेना है तो मेरे पास आओ। मैं घर में मिलूंगा या ऑफिस में।” उन्होंने कहा कि मेरी पार्टी के पदाधिकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मैं CM से अपील करता हूं कि कृपया मेरी पार्टी के पदाधिकारियों को नुकसान न पहुंचाएं।
विजय ने कहा, “जल्द ही, हर सच्चाई सामने आ जाएगी। मुझे इस घटना पर खेद है। हम राजनीतिक यात्रा पर हैं। इस पर हम मजबूती और हिम्मत से आगे बढ़ेंगे।” तमिल एक्टर विजय की पॉलिटिकल पार्टी TVK की चुनावी रैली में 27 सितंबर का शाम भगदड़ मची थी। इसमें 41 लोग मारे गए थे। घायल 51 लोग ICU में भर्ती हैं।
तमिलनाडु पुलिस ने इस मामले में अब तक 3 लोगों को अरेस्ट किया। इनमें TVK के जिला सचिव वीपी माथिय्यालगन और पदाधिकारी पौनराज और एक पत्रकार शामिल है।
मंगलवार को कोर्ट ने पौनराज और माथिय्यालगन को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पौनराज पर भगदड़ केस के मुख्य आरोपी माथिय्यालगन को शरण देने का आरोप है।
यूट्यूबर और पत्रकार फेलिक्स गेराल्ड को मंगलवार सुबह अरेस्ट किया गया। गेराल्ड पर अफवाहें फैलाने का आरोप है।
इधर, NDA सांसदों का पैनल मंगलवार को कोयंबटूर पहुंचा। जहां ये सभी मृतकों के परिजन और घायलों मिलेंगे। हादसे वाली जगह भी जाएंगे। पैनल में हेमा मालिनी, अनुराग ठाकुर समेत 8 सदस्य हैं।
इस मामले में एक FIR दर्ज की गई है। इसमें विजय पर आरोप हैं कि वे जानबूझकर रैली में देर से पहुंचे, ताकि ज्यादा भीड़ इकट्ठा हो। इसके अलावा, उन्होंने बिना अनुमति के रोड शो किया। FIR में कहा गया है कि विजय शाम करीब 4:45 बजे करूर में थे, लेकिन उनका काफिला शाम 7 बजे रैली स्थल पर पहुंचा, तब तक भीड़ बेकाबू हो चुकी थी।
पुलिस ने रैली के आयोजक और विजय के करीबियों को स्थिति बिगड़ने की चेतावनी दी थी, लेकिन उन्होंने नजरअंदाज किया। पुलिस ने FIR में विजय पर आरोप लगाए हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं किया है। जबकि उनके तीन करीबियों पर केस किया है।
इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (हत्या का प्रयास), 110 (हत्या का प्रयास करने का प्रयास), 125 (अन्य की जान को खतरे में डालना) और 223 (आदेश की अवहेलना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, तमिलनाडु सार्वजनिक संपत्ति (नुकसान और क्षति रोकथाम) अधिनियम, 1992 की धारा 3 के तहत भी कार्रवाई की गई है।

