भारत के लोकपाल कार्यालय ने 7 हाई-एंड BMW 330 Li लॉन्ग व्हील बेस (LWB) लग्जरी कारें खरीदने के लिए एक सार्वजनिक टेंडर जारी किया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम भ्रष्टाचार विरोधी संस्था की अपनी प्रशासनिक और लॉजिस्टिक व्यवस्था को मजबूत करने का हिस्सा है। टेंडर के अनुसार, हर कार की कीमत 70 लाख रुपए से अधिक है, और कुल 7 कारों की लागत 5 करोड़ रुपए से ज्यादा होने की उम्मीद है।
यह टेंडर 16 अक्टूबर को जारी हुई थी। टेंडर प्रक्रिया सबके लिए खुली है। लोकपाल ऑफिस ने इच्छुक पक्षों से 7 नवंबर से पहले अपनी बोली जमा करने को कहा गया है। बोली 7 नवंबर से शुरू होगी।
भारत का लोकपाल कार्यालय एक स्वतंत्र, संवैधानिक संस्था है। इसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत के शिकायतों की जांच करने और अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचारी को रोकने के लिए बनाया गया है।
इसे लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत गठित किया गया था। यह पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देता है।
लोकपाल में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्य होते हैं, जिनमें से आधे न्यायिक पृष्ठभूमि से होते हैं। अध्यक्ष आमतौर पर भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश होते हैं।
लोकपाल के सदस्यों की नियुक्ति एक चयन समिति करती है, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, विपक्ष के नेता, भारत के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रख्यात व्यक्ति शामिल होते हैं।
भारत का पहला लोकपाल 2019 में नियुक्त किया गया, जिसमें जज (सेवानिवृत्त) पिनाकी चंद्र घोष को अध्यक्ष बनाया गया। लोकपाल के वर्तमान अध्यक्ष जज (सेवानिवृत्त) अजय मणिकराव खानविलकर हैं। उन्हें फरवरी 2024 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नियुक्त किया था, उन्होंने मार्च 2024 से पदभार संभाला।
लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत तंत्र के रूप में देखा गया, लेकिन विपक्षी दलों ने इसके गठन, कार्य और प्रभावशीलता पर लगातार आलोचना की है।
कांग्रेस पार्टी इसे हमेशा राजनीतिक प्रभाव से ग्रस्त और कमजोर बताता आया है। विपक्ष आरोप लगाता आया है लोकपाल की नियुक्ति समिति में सत्ताधारी दल का वर्चस्व रहता है, जिससे लोकपाल की स्वतंत्रता प्रभावित होती है।
अधिनियम 2013 में पारित होने के बाद भी 2019 तक लोकपाल की नियुक्ति न होने पर विपक्ष (कांग्रेस, AAP आदि) ने NDA सरकार पर इच्छाशक्ति की कमी का आरोप लगाया था। अरुण जेटली (तत्कालीन विपक्षी नेता) ने कहा कि सरकार संसद से भाग रही है और नियुक्ति तंत्र को कंट्रोल कर रही है।

