सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले पर सुनवाई की। जहां राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी वकीलों के साथ मौजूद रहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग के निशाने पर है। जो काम 2 साल में होना था, उसे 3 महीने में करवाया जा रहा है।
सुनवाई के बाद CJI सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि असली लोग चुनावी सूची में बने रहने चाहिए। ममता की याचिका पर बेंच ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी से 9 फरवरी तक जवाब मांगा।
सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री ने कोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें रखीं। मुकदमों में आमतौर पर मुख्यमंत्रियों के वकील या सलाहकार ही पेश होते हैं।
इलेक्शन कमीशन ने कहा- राज्य सरकार से बार-बार मांग करने के बाद SIR के काम के लिए पर्याप्त ग्रुप बी अधिकारी नहीं दिए गए। इस कारण माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त करने पड़े। सभी नोटिस में कारण होते हैं। जिनके नाम हटे उन्हें अधिकृत एजेंटों को भी लाने की अनुमति दी गई थी।
हमने राज्य सरकार को कई पत्र लिखे हैं कि हमें क्लास 2 अधिकारी दें ताकि ERO को नियुक्त किया जा सके। उन्होंने उस रैंक के लगभग 80 अधिकारी दिए हैं, बाकी निचले रैंक के। इसलिए हमें माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त करने पड़े। गलती उनकी है। माइक्रो ऑब्जर्वर सही तरीके से नियुक्त किए गए हैं। राज्य सहयोग नहीं कर रहा है, तो कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है। समय की कोई समस्या नहीं है।
CJI सूर्यकांत ने कहा- सभी नोटिस वापस लेना अव्यावहारिक है। नाम की स्पेलिंग में गड़बड़ी होने पर चुनाव आयोग नोटिस जारी न करे। चुनाव आयोग अपने अधिकारियों को भी निर्देश दे कि वे संवेदनशील रहें। अगर राज्य सरकार ऐसे लोगों की टीम देती है, जो बांग्ला और स्थानीय बोलियां जानते हों, और वे जांच करके चुनाव आयोग को बताएं कि स्थानीय बोली के कारण गलती है, तो इससे मदद मिलेगी।
स्थानीय बोली के अनुवाद को AI की मदद लेने के कारण अगर ऐसा हो रहा है तो हम समाधान निकालेंगे। इस वजह से असली मतदाता को बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
ममता बनर्जी के इलेक्शन एफिडेविट के अनुसार उन्होंने 1979 में कोलकाता यूनिवर्सिटी से MA करने के बाद, जोगेश चंद्र चौधरी कॉलेज (कोलकाता) में LLB कोर्स में एडमिशन लिया था। 1982 में उनका LLB पूरा हो गया था। मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से पेश होने और बहस करने की अनुमति मांगने के लिए एक अंतरिम आवेदन भी दायर किया है।
अपने आवेदन में ममता ने कहा है कि आर्टिकल 32 रिट में याचिकाकर्ता होने के नाते वह मामले से पूरी तरह वाकिफ हैं। वे कहती हैं कि पश्चिम बंगाल की CM और TMC अध्यक्ष होने के नाते वह SC के तौर-तरीकों को समझती हैं और स्थापित नियमों के अनुसार ही व्यवहार करेंगी।


