हिमाचल प्रदेश में विवादित संजौली मस्जिद को शिमला नगर निगम आयुक्त ने पूरी तरह तोड़ने के आदेश दे दिए हैं। शनिवार को निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने मस्जिद को गैर कानूनी बताते हुए निचली 2 मंजिलें भी हटाने को कह दिया है।
यह फैसला तब आया है जब वक्फ बोर्ड निगम की अदालत में मस्जिद की जमीन पर मालिकाना हक के कागज ही पेश नहीं कर पाया। यही नहीं, मस्जिद का नक्शा और किसी भी तरह की NOC भी मस्जिद कमेटी के पास नहीं है। जबकि, वक्फ बोर्ड लंबे समय तक जमीन पर मालिकाना हक का दावा करता रहा।
अब मुस्लिम पक्ष का इस मामले में कहना है कि ऑर्डर को पूरी तरह पढ़ने और समझने के बाद ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी। मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद लतीफ का कहना है कि अभी आदेश की कॉपी उनके पास नहीं पहुंची है।
ऊपरी 3 मंजिलों को तोड़ने के आदेश पहले ही हो चुके
मस्जिद के ऊपर की 3 मंजिलों को तोड़ने के आदेश निगम आयुक्त बीते साल 5 अक्टूबर को दे चुके हैं। इसके बाद से ही मस्जिद को तोड़ने का काम चल रहा था। ताजा आदेश के बाद अब संजौली में रिहायशी इलाके में बनी मस्जिद को पूरी तरह हटाना होगा।
निगम ने निचली दोनों मंजिलों को अवैध माना: आदेश को लेकर लोकल रेजिडेंट के एडवोकेट जगतपाल ने कहा- 3 मई 2025 सभी के लिए ऐतिहासिक दिन है। शिमला निगम कमिश्नर के कोर्ट ने आज पूरी संजौली मस्जिद को गिराने का आदेश जारी किया है। जो 2 फ्लोर बचे थे, उन्हें भी अवैध माना है और पूरी तरह साफ करने को कहा है।
हाईकोर्ट से मिला था 6 सप्ताह का समय: उन्होंने कहा- जैसा कि मैंने आपको पहले भी बताया था कि 5 अक्टूबर 2024 के ऑर्डर में मस्जिद की ऊपरी 3 मंजिलों को गिराने का आदेश पहले ही दे दिया गया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि 6 सप्ताह में पूरे मामले का निपटारा किया जाए। इसके बाद कमिश्नर ने पूरी मस्जिद को ही हटाने को कहा है। हाईकोर्ट का दिया 6 सप्ताह का समय 8 मई को पूरा होना था, लेकिन लास्ट वर्किंग शनिवार आज था, इसलिए कमिश्नर ने दोपहर पौने 1 बजे ही फैसला सुरक्षित कर दिया था। इसके बाद करीब डेढ़ बजे फैसला सुनाया गया।
वक्फ बोर्ड के पास नहीं जमीन का मालिकाना हक: वकील ने बताया कि आज के आदेश में क्लियर किया गया है कि 15 साल से हिमाचल प्रदेश का वक्फ बोर्ड जमीन पर हक जता रहा है, लेकिन मालिकाना हक कोर्ट में साबित नहीं कर पाया। पुरानी मस्जिद को गिराते समय भी उन्होंने कोई शिकायत नहीं की थी, इसलिए मौजूदा समय में उस जगह पर किसी मस्जिद का अस्तित्व ही नहीं रहा। पुरानी मस्जिद गिराने के बाद वह जमीन अपने आप हिमाचल सरकार के पास चली गई थी।

