शिवसेना UBT प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि महायुति पहले वोट चुराती थी अब उम्मीदवार चुरा रही है। देश में ऐसा माहौल हो गया है जैसे लोकतंत्र पर भीड़तंत्र का कब्जा हो।
ये बातें उन्होंने शुक्रवार को महायुति के 68 उम्मीदवारों के निर्विरोध जीतने के मामले में कही। वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे 20 साल बाद शिवसेना भवन पहुंचे जहां दोनों नेताओं ने पार्टी मेनिफेस्टो भी रिलीज किया।
वहीं, महाराष्ट्र सीएम देवेंद्र फडणवीस ने वर्ली में एक रैली में कहा कि हम बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें देश से बाहर निकालेंगे। यह सुनिश्चित करेंगे कि देश की मुंबई को एक ऐसा मेयर मिले जो मराठी और हिंदू हो।
फडणवीस ने भाषा विवाद की आलोचना करते हुए कहा कि कोई भी मुंबई को राज्य के बाकी हिस्सों से अलग नहीं कर सकता और मुंबईकर विकास चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि यह चुनाव मुंबई और उसके लोगों के बारे में है, जो जाग गए हैं और प्रगति चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि जो लोग पहले BMC को नियंत्रित करते थे, उनकी निष्क्रियता के कारण हजारों मिल मजदूरों को शहर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को मांग की कि जिन नगर निगम चुनावों में उम्मीदवार निर्विरोध जीते हैं, उन्हें रद्द किया जाए और इन वार्डों में फिर से चुनाव शुरू किए जाएं।
उधर, महाराष्ट्र के ठाणे जिले में बीजेपी और शिवसेना के 32 उम्मीदवारों को निर्विरोध जीतने के बाद शिवसेना (UBT) और MNS ने भी चुनावों में धांधली का आरोप लगाया।
शिवसेना (UBT) के ठाणे प्रमुख केदार दिघे ने कहा कि पूरे राज्य में नगर निगम चुनावों में निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए 68 उम्मीदवारों में से, चौंकाने वाले 47 प्रतिशत (32 उम्मीदवार) अकेले ठाणे जिले के हैं।
उन्होंने परिणामों की वैधता पर सवाल उठाते हुए इस घटना को चुनाव इतिहास में बड़ी साजिश बताया। उन्होंने आगे तर्क दिया कि एक भी उम्मीदवार होने पर भी, मतदाताओं को नन ऑफ द अबव (NOTA) विकल्प प्रदान किया जाना चाहिए।
देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अगर विपक्षी पार्टियां नगर निगम चुनावों में महायुति उम्मीदवारों के निर्विरोध चुनाव को चुनौती देने के लिए कोर्ट जाती हैं, तो भी जनता का फैसला ही माना जाएगा।
बीजेपी और उसके महायुति सहयोगियों ने राज्य भर में 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों में 68 सीटें निर्विरोध जीत ली हैं। विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी गठबंधन ने उम्मीदवारों को चुनाव से हटने के लिए मजबूर करने के लिए धमकियों और पैसे का इस्तेमाल किया।
दरअसल, MNS ने शनिवार को कहा था कि वह महायुति उम्मीदवारों के निर्विरोध चुनाव को कोर्ट में चुनौती देगी।

