अयोध्या केस : आगे क्या होगा? आज बेंच बैठेगी, 3 दिन मोल्डिंग ऑफ रिलीफ

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New Delhi/Atulya Loktantra : सदियों पुराने अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई पूरी हो गई है. पिछले चालीस दिनों से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की रोजाना सुनवाई हो रही थी, हिंदू-मुस्लिम पक्षकारों की ओर से लगातार दलीलें दी गईं, अदालत में तीखी बहस भी हुई. बुधवार को शाम 5 बजे इस मामले की बहस खत्म हुई और सर्वोच्च अदालत ने अपना फैसला रिजर्व रख लिया. अब हर किसी की नज़र सिर्फ इस मामले के फैसले पर है.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में पांच जजों की पीठ ने इस मसले को सुना और अब वह इस ऐतिहासिक फैसले को लिखेंगे. उम्मीद जताई जा रही है कि इस मामले पर एक महीने के अंदर फैसला आ सकता है, हालांकि अदालत की ओर से फैसले की कोई तारीख निश्चित नहीं की गई है. जिसके पीछे कई तर्क दिए जा रहे हैं, दोनों पक्षों के वकील दावा कर रहे हैं कि फैसला उनके पक्ष में आने जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट में अब क्या होगा?
बुधवार को इस मामले पर बहस खत्म हुई तो सर्वोच्च अदालत की ओर से सभी पक्षों को मोल्डिंग ऑफ रिलीफ के लिए तीन दिन का समय दिया गया. अगले तीन दिन में पक्षकारों को लिखित हलफनामा अदालत में सबमिट करना होगा. इसके साथ ही मामले की सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ मुद्दों पर विचार करने के लिए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट चैंबर में बैठेगी और मामले पर विचार करेगी. अयोध्या पीठ की सुनवाई कर रहे सभी जज आज चेंबर बैठक में व्यस्त रहेगें, इस दौरान सभी जजों में अयोध्या केस को लेकर चर्चा हो सकती है.

एक महीने में रिटायर होंगे चीफ जस्टिस
इस मामले की सुनवाई संविधान पीठ कर रही है, जिसकी अगुवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे हैं. चीफ जस्टिस अगले महीने की 17 तारीख यानी 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं. ऐसे में वकीलों को उम्मीद है कि उनके रिटायरमेंट से पहले इस मामले में फैसला आ जाएगा. इससे पहले खुद चीफ जस्टिस भी कह चुके हैं कि इस मामले की सुनवाई वह 18 अक्टूबर से पहले खत्म करना चाहते हैं, क्योंकि एक महीना फैसला लिखने के लिए भी चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता है, तो फैसला आने में लंबा समय लग सकता है.

फैसला रिजर्व होने से फैसला आने तक का सफर
अक्सर लोगों के दिमाग में ये बात रहती है कि फैसला रिजर्व होने के बाद क्यों एक महीना लग रहा है. लेकिन फैसला लिखे जाने में काफी समय व्यतीत होता है, क्योंकि इसके लिए एक लंबी रिसर्च जरूरी होती है. फैसले के दौरान पुराने और ऐतिहासिक जजमेंट का उदाहरण दिया जाता है, शेर-शायरी, कविताएं, श्लोक आदि भी जजमेंट का हिस्सा होते आए हैं. अयोध्या मामले के मूल दस्तावेज़ भी करीब 30 हजार पेज से ज्यादा हैं.

सुनवाई के आखिरी दिन हुई तीखी बहस
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को इस मामले की आखिरी सुनवाई हुई और सभी पक्षों ने अपनी अंतिम दलीलें दीं. सुबह में हिंदू पक्षकारों ने अपनी दलीलें खत्म की और उसके बाद सबसे आखिरी दलील मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने दलील दी. हिंदू पक्षकारों की तरफ से ऐतिहासिक ग्रंथों, भावनाओं और ASI की रिपोर्ट का हवाला दिया और विवादित ज़मीन पर अपना हक जताया.
दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने हिंदू पक्षकारों की दलीलों को गलत बताया और हर एक दलील का तीखा जवाब दिया. बुधवार को ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान माहौल इतना गर्म था कि राजीव धवन ने अदालत में हिंदू पक्षकार की ओर से पेश किया गया नक्शा ही फाड़ दिया. हालांकि, बाद में उन्होंने अदालत में ही कहा कि नक्शा उन्होंने चीफ जस्टिस की हामी के बाद ही फाड़ा था.

मध्यस्थता फेल होने के बाद शुरू हुई थी रोजाना सुनवाई
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस ऐतिहासिक मामले में पहले मध्यस्थता का रास्ता अपनाने को कहा गया था, लेकिन ये सफल नहीं हो सका था. इसी के बाद 6 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की रोजाना सुनवाई चल रही है, अदालत ने हफ्ते में पांच दिन इस मामले को सुना. आखिरी कुछ दिनों में सुनवाई का वक्त एक घंटे के लिए बढ़ा दिया गया था.
इस मामले को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा संविधान पीठ में जस्टिस एस.ए. बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसए नज़ीर भी शामिल हैं.

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