बदरौला गांव के पशु वायरस की चपेट में

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बदरौला गांव के पशु वायरस की चपेट में
बदरौला गांव के पशु वायरस की चपेट में

Atulya loktantra News, बल्लभगढ़ तिगांव स्थित बदरौला गांव में मुंहपका-खुरनपका नामक बीमारी की चपेट में करीब 50 से अधिक पशु आ चुके हैं। लेकिन पशुपालन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस वजह से पशुपालक अपने स्तर पर निजी डॉक्टरों को बुलाकर इलाज करवा रहे हैं। जबकि पशुपालन विभाग की ओर से तुरंत डॉक्टरों की टीम नियुक्त हो जानी चाहिए थी।

बदरौला गांव के पशु वायरस की चपेट में
बदरौला गांव के पशु वायरस की चपेट में

पशुपालक कृष्ण भाटी, अभिषेक भाटी, प्रशांत, विकास ने बताया कि उनके दर्जनों पशु इस बीमारी से पीड़ित हैं। बीमार पशुओं ने चारा खाना बंद कर दिया है। उनके मुंह और पैरों में छाले पड़ गए हैं। 18-18 लीटर दूध देने वाले पशुओं का दूध 8 लीटर से भी कम रह गया है। गांव के बल्ली, प्रताप नेहपाल, करमी, रामपाल पशुपालकों ने बताया कौराली स्थित पशु चिकित्सालय से पशु चिकित्सक गांव में नहीं आए हैं। चिकित्सालय में जाने पर चिकित्सक मुंह खुर की दवाई खराब होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हाल ही में पशुओं को इससे बचाव के टीके भी लगवाए थे, इसके बावजूद यह कैसे हो गया। इसकी जांच की जानी चाहिए।

उधर, पशुपालन विभाग की डिप्टी डायरेक्टर डॉ़ नीलम आर्य का कहना है कि बदरौला गांव में मुंहपका-खुरपका बीमारी फैलने की जांच कराई जाएगी। गुरुवार को गांव में टीम भेजकर बीमार पशुओं का उपचार किया जाएगा।

बता दें कि यह रोग पशुओं को एक बहुत ही छोटे आंख से न दिख पाने वाले कीड़े द्वारा होता है। जिसे विषाणु या वायरस कहते हैं। मुंहपका-खुरपका रोग किसी भी उम्र की गायें व उनके बच्चों में हो सकता है। हालांकि गाय में इस रोग से मौत तो नहीं होती फिर भी दुधारू पशु सूख जाते हैं। इस रोग का क्योंकि कोई इलाज नहीं है इसलिए रोग होने से पहले ही उसके टीके लगवा लेना फायदेमन्द होता है। यह एक छूत की बीमारी होती है, जो एक पशु से दूसरे मे फैल जाती है।

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