फरीदबाद। एक तरफ हरियाणा पुलिस द्वारा आर्थिक अपराध व साइबर क्राइम के मामलों को सुलझाने में नंबर वन होने का दावा करती है वहीं करीब 700 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड करीब डेढ साल से खुला घूम रहा है और पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस मामले में बैंक अधिकारियों की भूमिका संदेह के दायरे में है लेकिन उनके विरूद्ध भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। फरीदबाद निवासी दुष्यंत शर्मा ने बताया कि उनके परिवारिक रिश्तेदार पंकज शर्मा, सुप्रीत व मुकेश ने उन्हें बताया कि वह उनको साथ लेकर एक कंपनी खोलना चाहते हैं। जिसके माध्यम से एक्सपोर्ट इंपोर्ट का काम किया जाएगा। दुष्यंत के अनुसार उसे कंपनी में निदेशक बनाया गया। जिसकी एवज उसके सभी दस्तावेज ले लिए और उसकी जानकारी के बगैर ही एक बैंक में खाता खुलवा दिया गया
। कुछ महीने से तक निदेशक के नाते उसे वेतन भी दिया गया। इसके बाद बैंक की एक कर्मचारी ने दूसरे बैंक में नौकरी ज्वाइन की। उक्त कर्मचारी ने दुष्यंत को फोन करके कहा कि वह गोल्डन ग्राहकों की श्रेणी में आते हैं तो वह अपना खाता उस बैंक से बदलकर उसके बताए हुए बैंक में ले आएं। दुष्यंत ने कहा कि खाते के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है। जांच में पता चला कि जिस खाते में दुष्यंत हिस्सेदार है वहां से सैकड़ों करोड़ का लेनदेन हुआ है।
यहां से विवाद बढ़ा तो पंचकूला पुलिस ने तीनों आरोपियों के विरूद्ध आईपीसी की धारा 420, 467,468,471,506,120-बी, तथा आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया। इस केस को लेकर पुलिस महानिदेशक ने एक एसआईटी का गठन भी किया। दुष्यंत ने बताया कि पुलिस ने जब आरोपियोंं को गिरफ्तार किया तो उन्होंने बताया कि इस घोटाले के असल मास्टर माइंड दीपक मित्तल व कपिल मित्तल हैं। एसआईटी ने मित्तल बंधुओं को भी जांच में शामिल कर लिया।
इस बीच पुलिस को चकमा देकर कपिल मित्तल विदेश चला गया जबकि बार-बार नोटिस दिए जाने पर भी दीपक मित्तल जांच में शामिल नहीं हो रहा है। शिकायतकर्ता दुष्यंत ने आरोप लगाया कि मित्तल बंधुओं की अग्रिम जमानत याचिका जिला कोर्ट तथा हाईकोर्ट से रद्द हो चुकी है। पुलिस ने अपनी कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए सात आरोपियों को तो गिरफ्तार किया लेकिन घोटाले के मास्टर माइंड आज भी खुले घूम रहे हैं। आरोपी नाम बदलकर दूसरी कंपनियों के नाम खुलेआम घोटाला कर रहे हैं। दुष्यंत ने कहा कि एसआईटी द्वारा इस मामले की जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इस केस की गहन जांच की जाए तो यह घोटाला हजारों करोड़ के लेनदेन का हो सकता है।


