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Reading: अपने इतिहास और राजनीति से विमुख होते हुए आज के युवा
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Home » अपने इतिहास और राजनीति से विमुख होते हुए आज के युवा
विचार

अपने इतिहास और राजनीति से विमुख होते हुए आज के युवा

Deepak Sharma
Last updated: 15 March, 2026
By Deepak Sharma
187 Views
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8 Min Read
Today's youth are becoming alienated from their history and politics.
Today's youth are becoming alienated from their history and politics.
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डॉ. हेमलता शर्मा •

किसी भी राष्ट्र की आत्मा उसके इतिहास में बसती है और उसकी दिशा उसकी राजनीति तय करती है। यदि कोई समाज अपने इतिहास से अनभिज्ञ हो जाए और उसकी युवा पीढ़ी राजनीति से विमुख हो जाए, तो यह केवल एक शैक्षिक समस्या नहीं रहती बल्कि यह पूरे राष्ट्र के भविष्य के लिए चेतावनी बन जाती है और दुर्भाग्य से आज भारत सहित दुनिया के कई देशों में यही स्थिति धीरे-धीरे स्पष्ट होती दिखाई दे रही है।

आज का युवा तकनीकी रूप से अत्यंत सक्षम है। उसके हाथ में इंटरनेट है, स्मार्टफोन है और सूचना के असंख्य स्रोत उपलब्ध हैं। लेकिन विडंबना यह है कि इतनी जानकारी के बावजूद ज्ञान की गहराई कम होती जा रही है। युवाओं का एक बड़ा वर्ग अपने ही देश के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन, संविधान और राजनीतिक व्यवस्था की मूलभूत समझ से दूर होता जा रहा है।यह स्थिति केवल युवाओं की लापरवाही का परिणाम नहीं है। इसके पीछे समाज, शिक्षा व्यवस्था, मीडिया और राजनीति—सभी की कुछ न कुछ जिम्मेदारी है।

इतिहास से दूरी क्यों –

इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का क्रम नहीं होता, बल्कि वह किसी भी राष्ट्र की सामूहिक स्मृति होता है। इतिहास हमें बताता है कि हम कौन हैं, किन संघर्षों से गुजरकर यहां तक पहुंचे हैं और किन मूल्यों पर हमारा समाज खड़ा है।
लेकिन आज इतिहास का अध्ययन अक्सर केवल परीक्षा के अंक प्राप्त करने का माध्यम बनकर रह गया है। स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को तिथियां, युद्ध और घटनाएं तो याद करवाई जाती हैं, परंतु उनके पीछे की विचारधाराएं, सामाजिक परिवर्तन और मानवीय संघर्षों की गहराई पर बहुत कम चर्चा होती है। परिणाम यह होता है कि छात्र इतिहास को बोझ समझने लगते हैं, प्रेरणा का स्रोत नहीं।जब इतिहास केवल रटने का विषय बन जाता है, तब वह युवा मन में जिज्ञासा या चेतना उत्पन्न नहीं कर पाता।

सोशल मीडिया की सतही दुनिया –

आज की डिजिटल दुनिया ने सूचना को बेहद आसान बना दिया है। लेकिन यह सुविधा अपने साथ एक बड़ा खतरा भी लेकर आई है—सूचना की सतहीता। रील्स, शॉर्ट वीडियो और त्वरित मनोरंजन की संस्कृति ने युवाओं की ध्यान क्षमता को कम कर दिया है। गहराई से पढ़ने और समझने की आदत कमजोर होती जा रही है। इतिहास और राजनीति जैसे विषय धैर्य और अध्ययन की मांग करते हैं, जबकि सोशल मीडिया तात्कालिक और हल्की जानकारी प्रदान करता है।
इसका परिणाम यह है कि युवा बहुत सारी सूचनाएं तो ग्रहण करता है, लेकिन उनके पीछे की सच्चाई और संदर्भ को समझने का अवसर नहीं पाता।

राजनीति से बढ़ती दूरी –

एक और गंभीर कारण राजनीति के प्रति युवाओं का बढ़ता अविश्वास है। भ्रष्टाचार, अवसरवाद और सत्ता संघर्ष की घटनाएं युवाओं के मन में यह धारणा पैदा करती हैं कि राजनीति केवल स्वार्थ और छल का खेल है। युवा यह सोचने लगता है कि राजनीति से दूर रहना ही बेहतर है। लेकिन यह सोच लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जागरूक नागरिक होते हैं। यदि युवा राजनीति से दूरी बना लेते हैं, तो निर्णय लेने की प्रक्रिया सीमित हाथों में सिमट जाती है।

राजनीति से दूरी बनाकर कोई भी नागरिक उसके प्रभाव से बच नहीं सकता। सरकार की नीतियां, कानून और निर्णय सीधे हर व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं।

मीडिया और राजनीतिक संरक्षण की भूमिका
मीडिया को समाज का चौथा स्तंभ कहा जाता है। उसका काम जनता को जागरूक करना और गंभीर मुद्दों पर चर्चा को प्रोत्साहित करना होता है। लेकिन आज कई बार मीडिया भी सनसनी, मनोरंजन और तात्कालिक बहसों में उलझा हुआ दिखाई देता है।
इतिहास, विचार और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गहरी चर्चा धीरे-धीरे कम होती जा रही है। इसके स्थान पर शोर, आरोप-प्रत्यारोप और सतही बहसें अधिक दिखाई देती हैं।

इसके साथ ही राजनीतिक संरक्षण की संस्कृति भी युवाओं को विचारशील नागरिक बनने से रोकती है। जब राजनीति केवल वोट बैंक और भावनात्मक नारों तक सीमित हो जाती है, तब समाज में गंभीर विमर्श की जगह कम हो जाती है।

समाज और परिवार की बदलती भूमिका –

पहले परिवारों में इतिहास और समाज की चर्चा सामान्य बात होती थी। बुजुर्ग स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक आंदोलनों और अपने अनुभवों की कहानियां सुनाते थे। इन कहानियों से युवाओं में राष्ट्र और समाज के प्रति जुड़ाव पैदा होता था।
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में ऐसे संवाद धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं। परिवारों में समय की कमी और डिजिटल व्यस्तता ने इस परंपरा को कमजोर कर दिया है।

समाधान क्या –

इस समस्या का समाधान केवल शिक्षा सुधार से नहीं होगा। इसके लिए समाज के हर स्तर पर प्रयास करना होगा।
सबसे पहले शिक्षा व्यवस्था को बदलना होगा। इतिहास और राजनीति को केवल परीक्षा के विषय के रूप में नहीं, बल्कि नागरिक चेतना के आधार के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को बहस, चर्चा और शोध के माध्यम से इन विषयों को समझने का अवसर मिलना चाहिए।
मीडिया को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उसे समाज में विचार और ज्ञान की संस्कृति को मजबूत करने के लिए गंभीर विषयों पर संतुलित चर्चा को बढ़ावा देना चाहिए।
परिवारों को भी अपने बच्चों के साथ इतिहास, समाज और लोकतंत्र के विषयों पर संवाद करना चाहिए। यह संवाद युवाओं के भीतर जिज्ञासा और जागरूकता को जन्म देता है।
और सबसे महत्वपूर्ण भूमिका स्वयं युवाओं की है। उन्हें यह समझना होगा कि केवल करियर और आर्थिक सफलता ही जीवन का उद्देश्य नहीं है। एक जागरूक नागरिक बनना भी उतना ही आवश्यक है।

निष्कर्ष यह है कि इतिहास से अनभिज्ञ समाज अपनी पहचान खो देता है और राजनीति से दूर समाज अपने भविष्य का नियंत्रण दूसरों के हाथों में सौंप देता है ,यदि हम एक मजबूत और जागरूक राष्ट्र का निर्माण करना चाहते हैं, तो हमें अपनी युवा पीढ़ी को इतिहास और राजनीति की समझ से समृद्ध करना होगा। क्योंकि वही पीढ़ी कल देश के निर्णय लेगी, समाज की दिशा तय करेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए भविष्य का मार्ग बनाएगी।
जागरूक युवा ही सशक्त लोकतंत्र की सबसे बड़ी गारंटी है। इसलिए यह समय केवल चिंता करने का नहीं, बल्कि युवाओं में ज्ञान, जिज्ञासा और नागरिक चेतना को पुनर्जीवित करने का है। तभी राष्ट्र का भविष्य वास्तव में उज्ज्वल और सुरक्षित कहा जा सकेगा।

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ByDeepak Sharma
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इस न्यूज़ पोर्टल अतुल्यलोकतंत्र न्यूज़ .कॉम का आरम्भ 2015 में हुआ था। इसके मुख्य संपादक पत्रकार दीपक शर्मा हैं ,उन्होंने अपने समाचार पत्र अतुल्यलोकतंत्र को भी 2016 फ़रवरी में आरम्भ किया था। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से इस नाम को मान्यता जनवरी 2016 में ही मिल गई थी ।
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