तेलंगाना के जगतियाल जिले के पेगडापल्ली गांव में 300 आवारा कुत्तों की जहरीला इंजेक्शन देकर हत्या कर दी गई। एक एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट के दावे के मुताबिक गांव के सरपंच ने दिसंबर में हुए चुनाव में जनता से कुत्तों से छुटकारा दिलाने का वादा किया था।
मामले में BNS और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। FIR में गांव के सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव को दोषी ठहराया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सरपंच ने आवारा कुत्तों को मारने के लिए कुछ लोगों को काम पर रखा था।
इससे पहले जनवरी में ही तेलंगाना में कुल 600 कुत्तों को अलग अलग गांवों में जहर देकर मारने की घटना सामने आई थीं। इससे मरने वाले कुल कुत्तों की संख्या 900 पहुंच गई है।
पुलिस ने बताया कि दफनाने की जगह से लगभग 70 से 80 कुत्तों के शव निकाले गए। ऐसा लग रहा था कि शवों को तीन से चार दिन पहले दफनाया गया था।
उन्होंने कहा कि इस स्तर पर, हम घटना में आरोपियों की संलिप्तता की पुष्टि नहीं कर सकते। उन्होंने आगे कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है और आगे की जांच जारी है।
तेलंगाना के गांवों में ग्राम पंचायत चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर आवारा कुत्तों को मारने के मामले सामने आए हैं। बीते एक हफ्ते में अलग-अलग जिलों के गांवों में करीब 600 कुत्तों की कथित तौर पर हत्या की गई है।
पालवंचा मंडल के 5 गावों- भवानीपेट, पालवंचा, फरीदपेट, वाड़ी और बंदारामेश्वरपल्ली गांवों में बीते दो-तीन दिनों में करीब 200-300 आवारा कुत्तों को मारने का आरोप है। पुलिस ने पांच सरपंचों सहित छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
इससे पहले, हनमकोंडा जिले के श्यामपेट और अरेपल्ली गांवों में 6 जनवरी से 9 जनवरी के बीच लगभग 300 आवारा कुत्तों की हत्या का मामला सामने आया था। पुलिस ने इस संबंध में दो महिला सरपंचों और उनके पतियों सहित नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के हमलों पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, ‘आवारा कुत्तों के किसी हमले में चोट या मौत होती है, तो नगर निकाय के साथ ही डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।’ कोर्ट ने कहा- पिछली सुनवाई की हमारी टिप्पणियों को मजाक समझना गलत होगा। हम गंभीर हैं।


