मुगल शासक औरंगजेब की तारीफ से शुरू हुए विवाद के बाद महाराष्ट्र के सपा विधायक अबू आजमी ने अपना बयान वापस ले लिया है। उन्होंने मंगलवार को कहा- मेरे शब्दों को तोड़-मरोड़ कर दिखाया गया है। लेकिन फिर भी मेरी बात से कोई आहत हुआ है तो मैं अपने शब्द, अपना स्टेटमेंट वापस लेता हूं।
बीते दिन आजमी ने कहा था कि- हमें गलत इतिहास दिखाया जा रहा है। औरंगजेब ने कई मंदिर बनवाए हैं। मैं उसे क्रूर शासक नहीं मानता। छत्रपति संभाजी महाराज और औरंगजेब के बीच धार्मिक नहीं बल्कि सत्ता और संपत्ति के लिए लड़ाई थी। अगर कोई कहता है कि यह लड़ाई हिंदू और मुसलमान को लेकर थी, तो मैं इस पर विश्वास नहीं करता।
विवाद बढ़ने पर अबू आजमी ने कहा- इसे हिंदू-मुसलमान एंगल न देंविवाद बढ़ने पर अबू आजमी ने कहा था- औरंगजेब ने मंदिरों के साथ मस्जिदों को भी नष्ट किया। अगर वह हिंदुओं के खिलाफ होता, तो 34% हिंदू उसके साथ नहीं होते। उसके शासनकाल में भारत को स्वर्ण चिड़िया कहा जाता था। इसे हिंदू-मुसलमान एंगल से नहीं देखना चाहिए।
सपा विधायक ने आगे कहा था- औरंगजेब ने 52 वर्ष शासन किया और अगर वह सच में हिंदुओं को मुसलमान में परिवर्तित करते, तो सोचिए कितने हिंदू परिवर्तित हो जाते। 1857 की विद्रोह में जब मंगल पांडे ने लड़ाई शुरू की, तो उसका साथ सबसे पहले मुसलमान बहादुर शाह जफर ने दिया था।
वहीं, डिप्टी CM एकनाथ शिंदे ने बयान का विरोध करते हुए कहा था कि अबू आजमी पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए।


