सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मामले पर सुनवाई के दौरान गंभीर सवाल उठाए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि यह राज्य बनाम चुनाव आयोग की लड़ाई नहीं है। बंगाल का वोटर दोनों के बीच फंसा हुआ है।
जस्टिस बागची ने आयोग से कहा- मान लीजिए कि जीत का अंतर 2% है और 15% मतदाता वोट नहीं डाल सके, तो हमें इस पर सोचना होगा। यह चिंता का मामला हो सकता है। यह मत समझिए कि बाहर किए गए मतदाताओं का सवाल हमारे दिमाग में नहीं है।
हालांकि कोर्ट ने उन लोगों को अंतरिम वोटिंग अधिकार देने से इनकार कर दिया है जिनके नाम SIR के दौरान हटा दिए गए थे और जिनकी अपीलें अभी भी अपीलीय ट्रिब्यूनलों में लंबित हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने से अपीलीय ट्रिब्यूनल पर भारी बोझ पड़ेगा और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम में तभी दखल दिया जाएगा, जब बड़ी संख्या में मतदाता बाहर किए गए हों और वह संख्या जीत के अंतर को प्रभावित करती हो।
जस्टिस बागची ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक रिपोर्ट में बताया है कि अपीलीय ट्रिब्यूनलों के पास 34 लाख अपीलें लंबित हैं। चुनाव आयोग ने लंबित मामलों पर सुनवाई के लिए 21 मार्च को 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल का गठन किया था।
जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया में काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों से भी जांच प्रक्रिया के दौरान कुछ गलतियां हुई होंगी। उन्होंने कहा- न्यायिक अधिकारियों से 100% सटीकता की उम्मीद नहीं की जा सकती, क्योंकि वे बहुत प्रेशर में काम कर रहे हैं।
जस्टिस बागची ने कहा कि जब कोई अधिकारी रोज 1000 से ज्यादा दस्तावेजों की जांच करता है और समयसीमा भी कड़ी होती है, तो 70% सटीकता भी बेहतरीन मानी जाएगी। इसलिए एक मजबूत अपीलीय तंत्र जरूरी है।
पश्चिम बंगाल में अक्टूबर 2025 में कुल वोटर 7.66 करोड़ थे। इनमें से अब तक 90.83 लाख नाम हटाए गए। लगभग 11.85% वोटर कम हो गए। यानी अब राज्य में 6.76 करोड़ वोटर हैं।
चुनाव आयोग ने फाइनल आंकड़े जारी नहीं किए हैं। इसके अलावा जांच के तहत आए 60.06 लाख वोटरों में से 27.16 लाख के नाम हटाए गए। बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में भी बड़े स्तर पर नाम हटे। नॉर्थ 24 परगना में 5.91 लाख में से 3.25 लाख नाम हटे। वहीं, 8.28 लाख में से 2.39 लाख नाम हटे।


