बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के कमिश्नर भूषण गगरानी ने 22 दिसंबर को लेटर जारी कर निचली अदालतों के स्टाफ को चुनाव ड्यूटी पर बुलाया था। इस आदेश पर बॉम्बे हाइकोर्ट ने पिछले हफ्ते स्वतः संज्ञान लेते हुए रोक लगा दी थी। सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने BMC को फटकार लगाई।
कोर्ट ने कहा कि कमिश्नर के पास किस प्रावधान से ये अधिकार हैं? आप उन्हें नहीं बुला सकते। आपके पास वे अधिकार नहीं हैं। इसपर कमिश्नर की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि कमिश्नर की ओर से वे लेटर जारी करना एक गलती थी। उन्हें वापस ले लिया गया है।
चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम की बेंच ने इसपर कहा कि अब आप खुद को बचाएं। मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी। हम चुनाव के बाद आपकी बात सुनेंगे।
22 दिसंबर, 2025 को कमिश्नर ने शहर की सभी निचली अदालतों के स्टाफ को एक लेटर जारी कर उन्हें चुनाव ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करने का निर्देश दिया था।
उसी दिन, चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने कमिश्नर और मुंबई शहर के कलेक्टर को सूचित किया कि हाई कोर्ट ने निचली अदालतों के स्टाफ सदस्यों के बारे में एक प्रशासनिक फैसला लिया है और उन्हें चुनाव ड्यूटी से छूट देने का अनुरोध किया है।
रजिस्ट्रार (निरीक्षण) द्वारा भी इसी तरह का कम्युनिकेशन भेजा गया था, जिसमें सिविक प्रमुख को HC द्वारा पारित प्रशासनिक आदेश के बारे में सूचित किया गया था।
इसके बावजूद, कमिश्नर ने 29 दिसंबर को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को एक लेटर जारी कर सूचित किया कि निचली अदालतों के स्टाफ को छूट देने का अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया है।
शिवसेना UBT प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को कहा कि महायुति पहले वोट चुराती थी अब उम्मीदवार चुरा रही है। देश में ऐसा माहौल हो गया है जैसे लोकतंत्र पर भीड़तंत्र का कब्जा हो। ये बातें उन्होंने शुक्रवार को महायुति के 68 उम्मीदवारों के निर्विरोध जीतने के मामले में कही। वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे 20 साल बाद शिवसेना भवन पहुंचे।


