कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि वेस्ट एशिया संकट से निपटने के लिए BRICS+ समिट को आगे क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा। पार्टी का आरोप है कि मोदी अमेरिका और इजराइल को नाराज नहीं करना चाहते।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पोस्ट में कहा- भारत इस साल नई दिल्ली में 18वीं BRICS+ समिट की मेजबानी करने वाला है। ऐसे में सरकार को वेस्ट एशिया संकट पर कूटनीतिक पहल के लिए इस मंच का इस्तेमाल करना चाहिए। खुद को ‘विश्वगुरु’ बताने वाले प्रधानमंत्री इस दिशा में पहल क्यों नहीं कर रहे हैं।
रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को नाराज नहीं करना चाहते। केवल फोन कॉल के जरिए बातचीत की सीमाएं होती हैं, जबकि समिट के जरिए ठोस फैसले और आमने-सामने बातचीत ज्यादा प्रभावी हो सकती है।
कांग्रेस ने पिछले हफ्ते भी केंद्र सरकार की आलोचना की थी। पार्टी का कहना था कि BRICS+ चेयर होने के बावजूद भारत ने वेस्ट एशिया संघर्ष पर कोई सामूहिक बयान जारी नहीं किया। 21 मार्च को भी कांग्रेस ने अमेरिका-इजराइल के हमले की निंदा न करने को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे।
दरअसल, BRICS समिट 2026 की अध्यक्षता भारत कर रहा है। 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की जिम्मेदारी 1 जनवरी को ब्राजील से भारत को मिली थी। 15 जनवरी को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने थीम, लोगो और वेबसाइट का शुभारंभ किया था।
पीएम मोदी ने 2025 में रियो डी जनेरियो में हुए 17वें ब्रिक्स समिट में भारत की योजना को साझा किया था। भारत का लक्ष्य ब्रिक्स को एक नए रूप में पेश करना है, जिसका फोकस है…
17वां BRICS समिट 6-7 जुलाई, 2025 को ब्राजील के रियो डी जनेरियो में हुआ। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा की अध्यक्षता में इस समिट का थीम था ‘ग्लोबल साउथ के लिए समावेशी और टिकाऊ सहयोग’।
इसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, यूएई) और साझेदार देशों के नेता शामिल हुए थे। मोदी इसमें भाग लेने के लिए ब्राजील गए थे। ये 12वां था जब मोदी BRICS समिट में भाग ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘ग्लोबल साउथ के देश अक्सर डबल स्टैंडर्ड का शिकार रहे हैं। चाहे विकास हो, संसाधनों की बात हो, या सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की, ग्लोबल साउथ को कभी प्राथमिकता नहीं दी गई है। इनके बिना, वैश्विक संस्थाएं ऐसे मोबाइल की तरह हैं, जिसमें सिम कार्ड तो है लेकिन नेटवर्क नहीं है।’


