शाहतलाई : झंडूता उपमंडल के अंतर्गत आने वाले पिछड़ा क्षेत्र कोटधार की ग्राम पंचायत सनीहरा के वीर सपूत, तीन युद्धों के योद्धा एवं पश्चिमी स्टार विजेता लांस नायक (हवलदार) चौकस राम के नाम पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भेड़ी का नामकरण करने की मांग उठी है। उक्त मांग के साथअखिल भारतीय गुर्जर महासभा हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष महेंद्र सिंह क्षेत्र के सामाजिक संगठनों एवं गुर्जर समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि जिस प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कलोल से प्रेरणा लेकर चौकस राम ने सेना में जाने का संकल्प लिया, उसी क्षेत्र के किसी एक स्वास्थ्य केन्द्र का नाम उनके नाम पर किया जाना चाहिए, विशेषकर पीएचसी भेड़ी का, जो गुर्जर बहुल क्षेत्र है।
लांस नायक चौकस राम का जन्म 25 अक्टूबर 1941 को ग्राम सनीहरा में स्वर्गीय चंदू राम के घर हुआ। उनके दादा दलीपा राम नम्बरदार इलाके के प्रथम शिक्षाविद् एवं विद्वान माने जाते थे। चौकस राम 25 अक्टूबर 1961 को भारतीय सेना की 15 फील्ड रेजिमेंट (तोपखाना) का हिस्सा है, में गनर के पद पर भर्ती हुए। उनका प्रशिक्षण महाराष्ट्र के देवलाली स्थित आर्टिलरी ट्रेनिंग सेंटर में हुआ। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 तथा 1971 के भारत-पाक युद्धों में सक्रिय भूमिका निभाई। 1971 के ऐतिहासिक युद्ध में, जिसमें भारत ने 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी बनाया और बांग्लादेश का गठन हुआ, उन्होंने पश्चिमी मोर्चे पर बहादुरी से डटकर मुकाबला किया। इसी युद्ध में उनके छोटे भाई गार्ड्स मैन प्रताप सिंह पूर्वी सीमा पर लड़ते हुए शहीद हो गए। काबिले गौर है कि छोटे भाई प्रताप सिंह की शहादत की खबर के मिलने के पश्चात एक सप्ताह के बाद युद्ध के बीच में ही घर आए व तीन दिन बाद वापिस युद्ध भूमि में लौट गए और जाते समय अपनी पत्नी कौशल्या देवी को समझाया कि हमारे जीवित आने का कोई पता नहीं है ।
उनके कोई बच्चा नहीं था इसलिए कह कर वापस युद्ध में लौट गए कि आप ससुराल में ही रहना। युद्ध के दौरान चौकस राम एक विशेष ऑपरेशन में गंभीर परिस्थितियों में फंस गए थे, लेकिन अदम्य साहस से दुश्मन क्षेत्र से सुरक्षित निकलने में सफल रहे। अखिल भारतीय गुर्जर महासभा हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष महेंद्र सिंह ने बताया कि तीनों युद्धों में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें पश्चिमी स्टार, सैन्य सेवा मेडल 1962, रक्षा मेडल 1965, संग्राम मेडल तथा 25वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ पदक से सम्मानित किया गया। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने क्षेत्र के युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया। उनके प्रेरणा से अनेक युवा सेना में गए। वे अपने क्षेत्र के पहले गुर्जर सैनिक थे जिन्होंने तीन बड़े युद्धों में भाग लिया। 85 वर्ष की आयु में 4 फरवरी 2026 को चंडीगढ़ में एक निजी अस्पताल में प्राण त्यागे । उनके पीछे भरा-पूरा परिवार है, जिसमें सभी संतानें उच्च सरकारी पदों पर कार्यरत हैं। क्षेत्रवासियों ने हिमाचल प्रदेश सरकार से मांग की है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भेड़ी का नाम वीर योद्धा लांस नायक चौकस राम के नाम पर रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके त्याग, साहस और देशभक्ति से प्रेरणा ले सकें।


