एक अप्रैल को सोशल मीडिया पर ‘वॉर लॉकडाउन नोटिस’ वायरल हुआ। इसके पीडीएफ के ऊपरी हिस्से पर सत्यमेव जयते के साथ अशोक चक्र दिख रहा है। जब इसे खोला गया तो यह ‘अप्रैल फूल’ का मजाक निकला। कई लोगों ने इसे फॉरवर्ड किया। हालांकि, दस्तावेज को खोलने पर इसके फेक होने की सच्चाई सामने आई।
लॉकडाउन की अफवाहें प्रधानमंत्री मोदी के संसद में दिए गए बयान के बाद शुरू हुई थीं। उन्होंने कहा था कि इस युद्ध के कारण दुनिया में जो कठिन हालात बने हैं, उनका प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की आशंका है। हम कोरोना के समय भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। 27 मार्च को सरकार के तीन मंत्रियों ने इसे नकारा था…
अप्रैल फूल डे हर साल 1 अप्रैल को मनाया जाता है। इस दिन लोग मजाक करते हैं, एक-दूसरे को हल्के-फुल्के तरीके से बेवकूफ बनाते हैं और फिर कहते हैं- अप्रैल फूल! माना जाता है कि 16वीं सदी में फ्रांस में जब नया साल 1 अप्रैल से बदलकर 1 जनवरी कर दिया गया, तब जो लोग पुरानी तारीख पर ही नया साल मनाते रहे, उनका मजाक उड़ाया गया। धीरे-धीरे यह परंपरा दुनिया के कई देशों में फैल गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 मार्च को ईरान जंग को लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा था कि सभी राज्य टीम इंडिया की तरह मिलकर काम करें और अपनी तैयारियां मजबूत रखें। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में PM ने राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की।


