पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुजरात के साणंद में माइक्रोन टेक्नोलॉजी की सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) फैसिलिटी का उद्घाटन किया।
पीएम ने कहा कि 10-11 साल पहले तक भारत में डेटा और चिप की चर्चा कम होती थी। पहले देश की पहचान सॉफ्टवेयर के रूप में थी, आज भारत हार्डवेयर बनाने के लिए भी पहचाना जाने लगा है।
इस प्लांट में पहली बार मेड इन इंडिया सेमीकंडक्टर मेमोरी मॉड्यूल्स का कमर्शियल प्रोडक्शन और शिपमेंट शुरू होगा। यह केंद्र सरकार के मेक इन इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन का पहला प्रोजेक्ट है। यह प्लांट 22,516 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ है। उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री यहां मौजूद लोगों को संबोधित भी करेंगे।
माइक्रोन की ये फेसिलिटी, आज का ये कार्यक्रम भारत और अमेरिका के बीच मजबूत साझेदारी का प्रमाण है। AI और चिप जैसे क्षेत्र में हमारी साझेदारी अहम है। दुनिया की दो बड़ी डेमोक्रेसी दुनिया के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
पिछली शताब्दी का रेग्युलेटर तेल था तो इस शताब्दी का रेग्युलेटर चिप होने वाली है। जब दुनिया कोविड से जूझ रही थी तब भारत ने सेमिकंडक्टर की घोषणा की थी। कोरोना के समय लगा सब बिखर रहा है, लेकिन जो बीज हमने बोया उसका फल आज मिल रहा है।
आज पूरी दुनिया के लिए एक ही मेसेज है, इंडिया इज रेडी, इंडिया इज रिलायबल। मेक इन इंडिया अब फुल स्विंग में आगे बढ़ रहा है। मैंने रतन टाट को मेसेज किया था, 1 रुपए का इन्वेस्टमेंट में देखिए एक गुजराती क्या कर सकता है।
मैं आप लोगों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि आप जो लाइफ चाहते हैं ये गुजरात है, ये वो भी बनाकर देगा, हम आपको कोई कमी नहीं होने देंगे। गुजरात ने नीतियां बनाई उसका फायदा जमीन पर दिख रहा है।
यह प्लांट एटीएमपी (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) टेक्नोलॉजी पर आधारित है। प्लांट में सेमीकंडक्टर चिप्स को जोड़ा जाएगा, उनकी जांच की जाएगी, उन पर जरूरी मार्किंग और फिर पैकेजिंग की जाएगी। इससे देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को मजबूती मिलेगी और देश टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
अब तक भारत माइक्रो चिप्स के मामले में आयात पर निर्भर रहा है। ऐसे में यह प्लांट देश में तकनीकी विकास, निवेश और रोजगार के नए रास्ते खोलेगा। साथ ही, यह ‘मेक इन इंडिया’ और डिजिटल भारत जैसे अभियानों को भी गति देगा।


