सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में जस्टिस वर्मा ने कैश कांड को लेकर उनके खिलाफ की गई कार्रवाई को चुनौती दी थी।
दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस वर्मा ने उनके घर जले नकदी नोट मामले में इन-हाउस कमेटी की रिपोर्ट और महाभियोग की सिफारिश रद्द करने की अपील की थी। रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया गया है।
जस्टिस वर्मा की याचिका खारिज, आगे 2 संभावनाएं
इस्तीफा सौंप दें: अगर जस्टिस वर्मा अपने पद से इस्तीफा दे देते हैं तो वह महाभियोग का सामना करने से बच जाएंगे। साथ ही उन्हें रिटायर्ड जज के तौर पर पेंशन भी मिलेगी।
महाभियोग का सामना करें: जस्टिस वर्मा को अगर महाभियोग के जरिए पद से हटाया जाता है तो उन्हें पेंशन और अन्य लाभ नहीं मिल पाएंगे। हालांकि वे इस्तीफा देने से पहले ही इनकार कर चुके हैं।
संसद में महाभियोग का नोटिस
जस्टिस वर्मा के खिलाफ संसद के दोनों सदनों में महाभियोग का नोटिस दिया जा चुका है। मानसून सत्र के दौरान लोकसभा के 152 सांसदों ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। वहीं राज्यसभा में 54 सांसदों ने जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन किया। हालांकि अब तक किसी भी सदन में इस नोटिस को स्वीकार नहीं किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 21 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को उनके सरनेम से संबोधित करने पर एक वकील को फटकार लगाई। दरअसल, वकील मैथ्यूज नेदुम्परा जस्टिस वर्मा को सिर्फ वर्मा कहकर संबोधित कर रहे थे।


