कंगना का यह बयान उस विवाद के बाद आया है, जिसमें 12 मार्च को संसद परिसर के मकर द्वार पर राहुल गांधी के चाय-नाश्ता करने को लेकर आलोचना हुई थी। इस मामले में 84 पूर्व ब्यूरोक्रेट्स , 116 पूर्व सैनिक और 4 वकीलों ने एक ओपन लेटर लिखकर राहुल गांधी से देश के लोगों से माफी की मांग की है।
कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने भाजपा सांसद कंगना रनौत पर कहा- कंगना रनौत की बातें उनके चरित्र को दर्शाती हैं। सिर्फ अच्छे कपड़े पहन लेने या सेलिब्रिटी होने से कोई अच्छा इंसान नहीं बन जाता। यही उनकी राजनीति का स्तर है, इसलिए वास्तव में उन्हें राहुल गांधी के बारे में बोलने का कोई अधिकार नहीं है।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा ने कहा- कंगना को लगता है कि संसद कोई स्टूडियो है, जहां अच्छे कपड़े पहनकर, पूरी तरह तैयार होकर और एक्टिंग करनी होती है। उन्हें क्यों लगता है कि राहुल टपोरी की तरह व्यवहार करते हैं? राहुल गांधी यहां फिल्म बनाने नहीं आते हैं।
वहीं शिवसेना (उद्धव गुट) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कंगना की टिप्पणी पर कहा- कुछ दिन पहले PM मोदी कह रहे थे कि वे कांग्रेस की महिला सांसदों से असहज महसूस कर रहे थे, इसलिए सांसद नहीं आए। अब कंगना राहुल पर बोल रही हैं।
प्रियंका ने आगे कहा- व्यक्तिगत या राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन राहुल गांधी के लिए इस तरह की बात कहना गलत है। मैंने राहुल गांधी के साथ 10 साल काम किया है। मैंने महिलाओं के प्रति उनका काम और सम्मान देखा है। उन पर इस तरह के आरोप लगाना थोड़ा अजीब है।
पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल (एस) नेता एचडी देवगौड़ा ने राहुल के व्यवहार को लेकर 16 मार्च को कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को लेटर लिखा था। उन्होंने लिखा- विपक्ष की वरिष्ठ नेता होने के नाते आप अपने सांसदों से बात करें और संसदीय मर्यादा बनाए रखने के लिए उन्हें समझाएं।
92 साल के देवगौड़ा ने दो पेज के लेटर में राहुल के हाल के प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि संसद के बजट सत्र के दौरान लगातार नारेबाजी, पोस्टर दिखाने और धरना-प्रदर्शन से लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को नुकसान पहुंच रहा है। संसद परिसर में सीढ़ियों पर बैठकर चाय-नाश्ते के साथ प्रदर्शन करना संस्थान की गरिमा को कम करता है।
अमित शाह ने 15 मार्च को असम के गुवाहाटी में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा- राहुल कभी-कभी संसद के दरवाजे पर बैठकर चाय और पकौड़े खाते हैं। क्या उन्हें यह एहसास नहीं है कि नाश्ता करने के लिए कौन-सी जगह उचित होती है?
शाह ने आगे कहा- संसद हमारे लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है। वहां बैठकर विरोध करना भी लोकतांत्रिक परंपरा नहीं है। लेकिन आप तो विरोध से भी दो कदम आगे बढ़ गए हैं। आप वहां चाय और पकौड़े खा रहे हैं। इससे दुनिया भर में भारत की छवि खराब हो रही है।


