दिल्ली शराब घोटाला मामले में सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान केजरीवाल ने इस केस की जज स्वर्ण कांता शर्मा से खुद को अलग (recuse) करने की मांग की। कहा कि वे खुद दलीलें रखेंगे। अभी तक मैंने किसी को भी अपना वकालतनामा नहीं दिया है।
जस्टिस शर्मा ने इस अर्जी को रिकॉर्ड पर लेते हुए इसकी सुनवाई 13 अप्रैल के लिए तय की। साथ ही CBI को कल तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और कहा कि अन्य कोई पक्ष भी यदि ऐसी अर्जी देना चाहता है तो दे सकता है।
CBI ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उसने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य 22 आरोपियों को शराब घोटाले केस में बरी कर दिया था।
केजरीवाल पत्नी सुनीता के साथ सुबह 11 बजे कोर्ट रूम पहुंचे थे। सुनवाई दोपहर 2:30 बजे शुरू हुई। यह सिर्फ 9 मिनट चली।
ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को राहत दी थी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में CBI की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी।
ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की याचिका पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई की थी। उन्होंने 9 मार्च को कहा था प्राइमा फेसी (पहली नजर में) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां गलत लगती हैं और उन पर विचार जरूरी है।
साथ ही, जस्टिस शर्मा की बेंच ने ट्रायल कोर्ट की ओर से CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी।
दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया।
इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ।
इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे।


