पश्चिम बंगाल के मालदा में SIR से जुड़े न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में मुख्य आरोपी समेत 35 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना के 48 घंटे के अंदर पुलिस ने आरोपी मोफक्करुल इस्लाम को बागडोगरा एयरपोर्ट से पकड़ा। वह बेंगलुरु भागने की फिराक में था।
इस्लाम कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील है। वह 2011 में AIMIM का उम्मीदवार रह चुका है। मोफक्करुल पर आरोप है कि मालदा के सुजापुर में 1 अप्रैल को SIR में नाम कटने के विरोध प्रदर्शन में भड़काऊ भाषण दिया।
इससे लोग भड़क गए और हजारों लोगों ने कलियाचक के BDO ऑफिस को घेर लिया। दो गेट बंद कर दिए गए, जिससे 7 न्यायिक अधिकारी 9 घंटे ऑफिस के अंदर बंधक रहे। देर रात 1 बजे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भारी सुरक्षाबल की मौजूदगी में अफसरों को बाहर निकाला गया था।
उधर, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इलेक्शन कमीशन ने इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है। एक टीम मालदा पहुंच चुकी है।
मालदा में विरोध प्रदर्शन दिन में पहले कालियाचक 2 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस के बाहर शुरू हुआ था। जो देर रात तक जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने शुरू में न्यायिक अधिकारियों से मिलने की मांग की थी। अंदर जाने की परमिशन न मिलने पर, उन्होंने शाम करीब 4 बजे प्रदर्शन शुरू कर दिया और परिसर का घेराव कर लिया। अधिकारियों को 9 घंटे से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा गया था।
इस मामले में पुलिस ने गुरुवार को 18 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक चुनावी उम्मीदवार भी शामिल है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली और 16 लोगों को गिरफ्तार कर जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
कलियाचक की घटना के बाद मालदा में 2 अप्रैल को भी विरोध प्रदर्शन हुआ। गुरुवार को नारायणपुर में BSF कैंप के सामने भीड़ इकठ्ठा हो गई। लोगों ने नेशनल हाईवे-12 को जाम कर दिया। सड़क पर टायरों में आग लगा दी गई।
मालदा, जलपाईगुड़ी, कूच बिहार और पुरबा बर्धमान में प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए, सड़कें जाम कीं और मौन जुलूस निकाले; इन जगहों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर एक्शन लिया और घटना को न्याय प्रशासन में बाधा डालने का एक ‘दुस्साहसी और जानबूझकर किया गया प्रयास’ बताया। CJI सूर्यकांत की बेंच ने इस बात पर चिंता जताई कि पहले से पता होने के बावजूद, राज्य के अधिकारी समय पर सुरक्षा मुहैया कराने में विफल रहे, जिसके कारण अधिकारियों को घंटों तक बिना खाना-पानी के रहना पड़ा।
यह घटना सोची-समझी और भड़काऊ लगती है। हमें पता है उपद्रवी कौन हैं, इनका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है।


