कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को सरकार की मेक इन इंडिया पहल पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ असेंबलिंग है, प्रोडक्शन नहीं। जब तक भारत उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं बन जाता, रोजगार, विकास और मेक इन इंडिया की बातें सिर्फ भाषण ही रहेंगी।
राहुल ने X पर हिंदी में एक पोस्ट में लिखा- ग्राउंड लेवल पर बदलाव और असेंबली लाइन से आगे बढ़कर ही भारत मैन्यूफैक्चरिंग पावर बन सकता है। तभी हम चीन के साथ मुकाबला कर सकेंगे।
राहुल ने ग्रेटर नोएडा में टीवी असेंबल करने वाली एक लोकल यूनिट का दौरा किया। उन्होंने 7 मिनट का एक वीडियो भी शेयर किया है।
क्या है मोदी सरकार का मेक इन इंडिया इनीशिएटिव
मेक इन इंडिया भारत सरकार की एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2014 को लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य भारत को विश्व का अग्रणी विनिर्माण, निवेश और नवाचार हब बनाना था।
शुरुआत में 25 प्रमुख सेक्टर टारगेट रहे। इस पहल के बाद वर्ल्ड बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में भारत 2014 के 142वें स्थान से 2020 में 63वें स्थान पर आया। मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन चुका है।
2020 के बाद भारत को मजबूरी में PLI स्कीम लॉन्च करनी पड़ी ताकि कंपनियों को आर्थिक प्रोत्साहन दिया जा सके। इससे मेक इन इंडिया के मूल ढांचे की कमी उजागर हुई। हालांकि मेक इन इंडिया 2.0 के जरिए सेक्टर स्पेसिफिक स्ट्रेटेजी, ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल्स पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
राहुल गांधी ने मई 2025 में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ऑपरेशन सिंदूर और प्रधानमंत्री मोदी पर बयान दिया। राहुल बोले कि ट्रम्प का एक फोन आया और नरेंद्र जी तुरंत सरेंडर हो गए। उन्होंने कहा, “इतिहास गवाह है, यही BJP-RSS का कैरेक्टर है। ये हमेशा झुकते हैं। भारत ने 1971 में अमेरिका की धमकी के बावजूद पाकिस्तान को तोड़ा था। कांग्रेस के बब्बर शेर और शेरनियां सुपर पावर से लड़ते हैं, कभी झुकते नहीं हैं।


