पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में तनाव कम करने, संवाद बढ़ाने और शांति बहाली की जरूरत पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि उन्होंने मैक्रों से बातचीत में कहा कि पश्चिम एशिया में हालात चिंताजनक हैं और तनाव कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति जरूरी है। दोनों नेताओं ने शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
PM के मुताबिक, उन्होंने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक को ईद की बधाई दी और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। उन्होंने ओमान की संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा की और वहां से भारतीयों सहित लोगों की सुरक्षित वापसी में उसकी भूमिका की सराहना की।
दोनों देशों ने होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित जहाजों की आवाजाही पर भी जोर दिया। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से बातचीत में भी पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता जताई और शांति बहाली के लिए संवाद को जरूरी बताया।
अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ। अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के परमाणु स्थलों, मिसाइल बुनियादी ढांचे और नेतृत्व को निशाना बनाया गया। इसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो गई।
इसके जवाब में ईरान ने मीडिल ईस्ट के कई देशों पर तेज और लगातार हमले किए। उसने पूरे क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगियों पर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन दागे। इन हमलों, खासकर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों के कारण खाड़ी देशों से ईरान के रिश्ते और खराब हो गए और ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर भी असर पड़ा।
ईरान ने हमलों के जवाब में होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते सभी देशों में तेल आपूर्ति रोक दी, जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बड़ी चोट पहुंची है। ट्रम्प अब अपने सहयोगी नाटो देशों से होर्मुज में रास्ता खुलवाने की अपील कर रहे हैं।
हालांकि इन देशों ने साफ कर दिया है कि वे होर्मुज स्ट्रेट में अपने वॉरशिप नहीं भेजेंगे। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर नाटो देश इस अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोलने में मदद नहीं करते, तो नाटो का भविष्य खराब हो सकता है।


