तेलंगाना के गांवों में अब अजीब सन्नाटा है। कुछ दिन पहले तक गांव में कोई अजनबी आता था तो आवारा कुत्ते भौंक-भौंक कर गांव को चेता देते थे। अब यहां कोई हलचल नहीं होती। यह हालात किसी एक गांव के नहीं। राज्य के छह जिलों के 12 से ज्यादा गांवों में इस साल की शुरुआत से अब तक 1600 से अधिक कुत्ते मार दिए जाने के आरोप सामने आए हैं। शुरुआत में यह संख्या कम थी। धीरे-धीरे आंकड़ा बढ़ता गया।
दरअसल, गांवों में कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ीं तो दिसंबर में हुए सरपंच चुनाव में यह मुद्दा प्रमुख रूप से उठा। कई जनप्रतिनिधियों ने ‘कुत्ता मुक्त गांव’ बनाने का वादा किया। इसके बाद गांव से कुत्ते गायब होने लगे। गांव के बाहर सामूहिक कब्र मिलीं, तो संदेह गहराया। जांच में साफ हो गया कि यह सब योजनाबद्ध तरीके से किया गया। आरोप है कि आंध्र प्रदेश से डॉग कैचर्स बुलवाए और 500 रुपए प्रति कुत्ते के हिसाब से जहरीले इंजेक्शन दिए गए।
हनुमानकोंडा जिले के श्यामपेट और अरपेल्ली गांवों में 300 कुत्तों की हत्या की शिकायत दर्ज कराई गई है। कामारेड्डी जिले के वाड़ी, फरीदपेट, बंदारमश्वेरपल्ली, भवानीपेट और पलवनचा गांवों में 200 कुत्ते मारे गए। जगित्याल जिले में धर्मपुरी क्षेत्र में 30, पगड़ापल्ली गांव में 300, रंगारेड्डी जिले के याचरम में 140, निर्मल जिले में 200 कुत्ते मारे जाने के आरोप हैं।
2020 से जुलाई 2025 तक 14,88,781 लोगों को कुत्तों ने काटा और उन्हें इलाज की जरूरत पड़ी। यूथ फॉर एंटी करप्शन की आरटीआई अर्जी के जवाब में स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि इस दौरान 36,07,989 एंटी-रेबीज वैक्सीन डोज दी गईं।
याचरम के प्राथमिक स्वास्थ्य सेंटर की नर्स रश्मि के मुताबिक, हाल ही में कुत्तों के काटने के कई मामले आए। पांच साल की एक बच्ची के सिर पर कुत्ते ने काटा, उसकी भौंह लगभग फट गई। 30 साल के व्यक्ति की पिंडली की मांसपेशी कुत्ते ने निकाल दी।
क्रूरता निवारण सहायक, स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया की अफसर मुदावथ प्रीति ने दैनिक भास्कर को बताया कि जहरीले इंजेक्शन का दुरुपयोग इंसानों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकता है। पुलिस ने सभी शव बरामद नहीं किए। वास्तविक संख्या से कम आंकड़े दर्ज किए। संगठन ने राज्य सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की है।


