केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अब तक की जांच से लग रहा है कि सबरीमाला मंदिर के गेट पर रखी दो प्रतिमाओं (द्वारपालक) से सोने की हेराफेरी हुई है। कोर्ट ने मामले में क्रिमिनल केस दर्ज करने और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को जांच शुरू करने का निर्देश दिया।
जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की बेंच ने SIT को छह हफ्ते के भीतर जांच रिपोर्ट दाखिल करने और हर दो हफ्ते में एक बार जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि जांच से जुड़ी कोई भी जानकारी लीक नहीं होनी चाहिए।
बेंच ने आगे कहा कि अब तक की जांच से पता चला है कि उन्नीकृष्णन पोट्टी (सोने की परत चढ़ाने की पेशकश करने वाले स्पांसर) को काफी मात्रा में सोना सौंपा गया था। कोर्ट ने कहा कि पोट्टी को लगभग 474.9 ग्राम सोना दिया गया था।
हाईकोर्ट ने 6 अक्टूबर को पिछली सुनवाई में द्वारपालक की मूर्तियों से सोने की चोरी मामले की जांच के लिए SIT गठित की थी। कोर्ट ने उन्नीकृष्णन पोट्टी के उस ईमेल का भी जिक्र किया, जो उसने 9 दिसंबर, 2019 को TDB के अध्यक्ष को भेजा था।
उन्नीकृष्णन ने ईमेल में लिखा था- सबरीमाला गर्भगृह के मुख्य द्वार और द्वारपालकों की मूर्तियों पर परत चढ़ाने के बाद मेरे पास कुछ सोना बचा है। मैं TDB के साथ मिलकर इसका इस्तेमाल एक लड़की की शादी के लिए करना चाहता हूं, जिसे मदद की जरूरत है। कृपया इस संबंध में अपनी राय दें।
अदालत ने कहा कि 2019 में उन्नीकृष्णन को सोने की परत चढ़ाने के लिए सौंपी गई मूर्तियों पर केवल तांबे की प्लेटें नहीं थीं, बल्कि 1999 में उन पर सोने की परत चढ़ाई गई थी। इस खुलासे से चोरी का केस बन गया है।
सबरीमाला मंदिर के TDB ने मंगलवार को हरिपाद में डिप्टी देवास्वोम कमिश्नर बी मुरारी बाबू को जांच के दौरान निलंबित कर दिया। बोर्ड के मुताबिक, बाबू ने 17 जुलाई 2019 को सबरीमाला के कार्यकारी अधिकारी को एक रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें उन्होंने मंदिर के प्रवेश द्वार के दोनों तरफ लगी सोने की मूर्तियों को गलत तरीके से तांबे की बताया था। बोर्ड ने इसे गंभीर चूक माना।
उधर, बाबू ने आरोपों से इनकार किया। बाबू ने दावा किया कि 2019 में उन्होंने मंदिर के तांत्री की राय लेकर प्रारंभिक रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में तांबे की प्लेट लिखा क्योंकि वास्तव में तांबा ही साफ दिख रहा था। इसलिए सोना चढ़ाने का निर्देश दिया गया था।
29 सितंबर को मामले में जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान TDB को फटकार लगाई। कहा कि बोर्ड ने मंदिर की कीमती सामान का सही रजिस्टर नहीं रखा, जिससे गड़बड़ियां छिपाने में मदद मिली।
अदालत ने कहा कि भक्तों के चढ़ाए आभूषण और सिक्कों का रिकॉर्ड रजिस्टर में रखा जाता है, जिसमें डिस्क्रिप्शन, तारीख, प्राप्ति और क्वालिटी लिखी जाती है, लेकिन कोडीमारम, द्वारपालक मूर्तियां, पीडम जैसी अन्य चीजों का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
अदालत ने नोट किया कि इन सामानों को किसी को देने की भी कोई एंट्री नहीं है। द्वारपालक मूर्तियों को दोबारा लगाते समय उनका वजन भी रिकॉर्ड नहीं किया गया, जो जानबूझकर हुआ जिससे 4 किलो सोने की कमी सामने न आए।


