अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साउथ एशिया इंस्टीट्यूट में हाल ही में पाकिस्तान कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें पाकिस्तान वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब और अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रिजवान सईद शेख ने हिस्सा लिया।
यह कार्यक्रम 27 अप्रैल को हुआ था, जिसका आयोजन पाकिस्तानी छात्रों ने किया था। इस इवेंट के 4 दिन पहले यानी 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था।
इस कॉन्फ्रेंस को लेकर भारतीय स्टूडेंट्स ने हार्वर्ड के सामने अपना विरोध और आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद हार्वर्ड ने खुद को इस मुद्दे से अलग कर लिया और अपनी वेबसाइट से कार्यक्रम की जानकारी हटा दी।
भारतीय स्टूडेंट्स ने अमेरिकी विदेश मंत्री को चिट्ठी लिखी
दो भारतीय स्टूडेंट सुरभि तोमर और रश्मिनी कोपरकर ने हार्वर्ड एडमिनिस्ट्रेशन और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को लेटर लिखा। लेटर में उन्होंने लिखा कि यूनिवर्सिटी को पाकिस्तानी सरकार के अधिकारियों को बुलाना गलत था।
स्टूडेंट्स ने लिखा- आतंकवाद को बढ़ावा देने या उसे उचित ठहराने वाली सरकार के अधिकारियों को बुलाना गलत है। लोग हार्वर्ड पर भी ये सवाल उठाएंगे कि आतंकवादी हमले में यूनिवर्सिटी भी शामिल है।
स्टूडेंट्स ने यह भी मांग की कि हार्वर्ड पहलगाम हमले की सार्वजनिक रूप से निंदा करे। इस इवेंट का आयोजन हार्वर्ड के पाकिस्तानी छात्रों ने किया था।
हार्वर्ड के साउथ एशिया इंस्टीट्यूट की सफाई- स्टूडेंट्स ने स्वतंत्र रूप से आयोजित किया था
इसके अलावा ये भी पता चला कि यूनिवर्सिटी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हितेश हाथी ने हाल ही में पाकिस्तानी-अमेरिकी इतिहासकार आयशा जलाल के साथ एक पैनल चर्चा में भाग लिया था।
पाकिस्तान कॉन्फ्रेंस पर बढ़ते विवाद के बीच, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साउथ एशिया इंस्टीट्यूट ने अपने बचाव में एक बयान जारी किया। इंस्टीट्यूट ने पहलगाम हमले के पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की, साथ ही बताया कि स्टूडेंट्स ने स्वतंत्र रूप से कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया था।


