पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी (Four Stars of Destiny)’ पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कहा कि किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई। इसका कोई हिस्सा सार्वजनिक नहीं किया गया।
कंपनी ने कहा कि पब्लिशिंग के सभी राइट्स हमारे पास हैं। अब तक किताब की न तो कोई छपी हुई कॉपी आई है और न ही डिजिटल कॉपी सामने आई है।
इसके जवाब में राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा- या तो नरवणे झूठ बोल रहे हैं, या पेंगुइन कंपनी। वहीं कंपनी के बयान को पूर्व आर्मी चीफ ने X पर रीपोस्ट किया। उन्होंने लिखा- यह है बुक पर स्थिति।
दरअसल, कंपनी की सफाई इसलिए आई क्योंकि किताब की अनअथॉराइज्ड कॉपियों के लीक और ऑनलाइन सर्कुलेशन का दावा सामने आया था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR भी दर्ज की है।
यह कार्रवाई अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन न्यूज फोरम पर मिली जानकारी के आधार पर की गई, जिसमें दावा किया गया था कि किताब की प्री-प्रिंट कॉपी सर्कुलेट हो रही है।
राहुल गांधी ने मंगलवार को लोकसभा के बाहर कहा- एमएम नरवणे ने X पर पोस्ट किया है, ‘हेलो दोस्तों, मेरी किताब अब अवेलेबल है। लिंक फॉलो करें। हैप्पी रीडिंग’। या तो एमएम नरवणे झूठ बोल रहे हैं, या पेंगुइन झूठ बोल रहा है। मैंने आर्मी चीफ पर विश्वास करना चुना।
उन्होंने आगे कहा कि क्या आप एमएम नरवणे के बजाय पेंगुइन पर विश्वास करेंगे? किताब में कुछ ऐसी बातें हैं जो सरकार के लिए असुविधाजनक हैं।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने X पर लिखा कि पेंगुइन इंडिया ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है, जाहिर है वे भारी दबाव में हैं। पेंगुइन ने जो उचित समझा वो किय, लेकिन चीफ अभी भी सच्चाई के साथ खड़े हैं। यह किताब 2024 में प्रकाशित हुई थी और अमेजन पर बिक्री के लिए उपलब्ध थी।
पवन खेड़ा ने आर्मी चीफ नरवणे का एक पोस्ट भी शेयर किया है, जिसमें नरवणे ने पेंगुइन इंडिया की पोस्ट शेयर करते हुए लिखा था- मेरी किताब अब अवेलेबल है। लिंक फॉलो करें।
पुलिस के मुताबिक इस किताब के पब्लिकेशन के लिए अभी संबंधित अधिकारियों से आवश्यक मंजूरी नहीं मिली है। पुलिस जांच में सामने आया कि इसी टाइटल वाली किताब की PDF कॉपी कुछ वेबसाइट्स पर उपलब्ध थी।
आशंका जताई गई है कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने जो कॉपी तैयार की थी, यह वही हो सकती है। इसके अलावा, कुछ ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म्स पर किताब के कवर को इस तरह दिखाया गया, जैसे वह खरीद के लिए उपलब्ध हो।
इस पूरे मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने केस दर्ज किया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अप्रकाशित और बिना मंजूरी वाली किताब की सामग्री कैसे सार्वजनिक हुई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।


