शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के मामले FIR दर्ज कर ली गई है। प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज FIR में शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद का भी नाम है। झूंसी थाना प्रभारी महेश मिश्रा के मुताबिक, 2-3 अज्ञात के खिलाफ भी पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
दरअसल, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की याचिका पर प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने शनिवार को FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे। आशुतोष ब्रह्मचारी ने कोर्ट में 2 बच्चों को पेश करके गंभीर आरोप लगाए थे। कोर्ट में कैमरे के सामने बच्चों के बयान दर्ज हुए थे। अदालत ने 13 फरवरी को अपना आदेश रिजर्व रख लिया था।
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने FIR में कहा कि मेरे ट्रस्ट की ओर से माघ मेला में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुक्ति के लिए माता शाकुंभरी देवी का महायज्ञ किया जा रहा है। शिविर में 2 नाबालिग शिष्य आए। उन्होंने मेरे सामने कई खुलासे किए।
नाबालिग शिष्यों ने बताया- हम असुरक्षित हैं। हमें पुलिस संरक्षण और न्यायिक सहायता दिलाई जाए। बच्चों ने बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों ने हमें अपने साथ रखा। कई बार कुकर्म किया। यह सब एक साल तक किया गया।
नाबालिग बच्चों ने बताया- महाकुंभ 2025 के दौरान मेला क्षेत्र में भी कुकर्म किया गया। माघ मेला-2026 में भी हमारे साथ कुकर्म किया गया। अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य यह कहकर बच्चों पर दबाव बनाते थे कि यह गुरु-सेवा है। इससे आशीर्वाद मिलेगा। अविमुक्तेश्वरानंद अपनी गाड़ी में जबरदस्ती करते थे। उन्हें अविमुक्तेश्वरानंद के साथ सोने को कहा जाता है।
आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया कि दोनों बच्चे मौका पाकर हमारे शिविर में आए। इसके बाद 24 जनवरी को झूंसी थाने में शिकायत दी गई। 25 जनवरी को पुलिस कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक माघ मेला को ई-मेल से शिकायत की। 27 जनवरी को डाक से पुलिस अधीक्षक माघ मेला को शिकायत भेजी गई। इसके बाद मुझे धमकियां मिलने लगीं।
8 फरवरी को मैंने कोर्ट की शरण लिया। स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के आदेश के बाद 21 फरवरी 2026 को मेरी FIR दर्ज की गई।
इससे पहले पॉक्सो कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया था। कहा था- हर मामले में FIR दर्ज करना अनिवार्य नहीं होता। मजिस्ट्रेट को अपने विवेक से तय करना होता है कि FIR का निर्देश दिया जाए या शिकायत के रूप में आगे बढ़ाया जाए। यदि मामले में पुलिस जांच जरूरी हो, तो FIR दर्ज कर जांच करना उचित होता है।
कोर्ट ने कहा था- आरोप गंभीर और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं और पॉक्सो अधिनियम लागू होता है। साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस जांच आवश्यक है। केवल निजी शिकायत के रूप में मामला आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।
जज ने आदेश दिया था कि संबंधित थाना प्रभारी तत्काल FIR दर्ज करें। कानून के अनुसार स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करें। पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों का पालन किया जाए। पीड़ितों की पहचान और गरिमा की रक्षा की जाए। जांच रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए।


