18वीं लोकसभा के बजट सत्र का पहला हिस्सा बुधवार को लोकसभा और राज्यसभा की जॉइंट मीटिंग में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ शुरू हो गया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार देश में आर्थिक प्रगति और सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार भ्रष्टाचार और घोटालों से निपटने में सफल रही है।
राष्ट्रपति ने 45 मिनट की स्पीच में VB- जी राम जी कानून का भी जिक्र किया। इस पर विपक्ष ने हंगामा किया और कानून वापस लो के नारे लगाए। उधर, एनडीए सांसदों ने समर्थन में नारेबाजी की। पीएम मोदी और अमित शाह भी मेज थपथपाते नजर आए।
बजट सत्र 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक चलेगा। यह दो हिस्सों में होगा। पहला हिस्सा 28 जनवरी से 13 फरवरी तक और दूसरा हिस्सा 9 मार्च से 2 अप्रैल तक होगा। इस दौरान कुल 30 बैठकें होंगी। 28 जनवरी और 1 फरवरी को कोई शून्यकाल नहीं होगा।
भारत दुनिया में सेतु की भूमिका निभा रहा: विश्व आज कठिन कालखंड से गुजर रहा है। लंबे समय से चले आ रहे समीकरण भी बदल रहे हैं। कठिन परिस्थितियों के बीच भी भारत तेजी से विकास की राह पर बढ़ रहा है। इसके पीछे दूरगामी विदेश नीति की भूमिका है। भारत पर दुनिया के देश भरोसा व्यक्त करते हैं। भारत सेतु की भूमिका निभा रहे हैं। भारत ने मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी है। भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज को और मुखरता से तेज किया है। पुराने संबंधों को मजबूती देते हुए नए संबंध भी विकसित किए हैं। ग्लोबल पॉलिटिक्स का अंतिम ध्येय मानवता की सेवा होनी चाहिए।
भारत के पास होगा स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन: देश में वर्तमान में 150 वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं। भारत अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यूरोपीय संघ के साथ मुक्त समझौते से सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा। युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, ‘श्री गुरु तेग बहादुर जी ने हमें सिखाया-‘भय काहूं को देत नहीं, नहीं भय मानत आन’, यानी न हम किसी को डराएं और न ही किसी से डरें। इसी निडर मन और भावना के साथ हम देश की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
भारत ने यह सिद्ध किया है कि शक्ति का प्रयोग जिम्मेदारी और विवेक के साथ किया जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पूरी दुनिया ने भारतीय सशस्त्र बलों का शौर्य देखा।
अपने संसाधनों के बल पर हमारे देश ने आतंक के अड्डों को नष्ट किया। मेरी सरकार ने यह कड़ा संदेश दिया है कि भारत पर होने वाले हर हमले का जवाब मजबूत और निर्णायक होगा।
सिंधु जल संधि को स्थगित रखा गया है और यह आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई का हिस्सा है। देश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र पर भी काम किया जा रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, ‘मेरी सरकार की नीतियों के अनुरूप सुरक्षा बलों ने माओवादी आतंक के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की है। वर्षों तक देश के 126 जिलों में भय और अविश्वास का माहौल था। माओवादी विचारधारा ने कई पीढ़ियों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया। इससे युवाओं, आदिवासियों और दलितों को सबसे अधिक नुकसान हुआ।
आज माओवादी आतंक की चुनौती सिमटकर केवल 8 जिलों तक रह गई है। इनमें से भी 3 जिले ऐसे हैं जो गंभीर रूप से प्रभावित हैं। बीते एक वर्ष में माओवादियों से जुड़े करीब 2000 लोगों ने आत्मसमर्पण किया है। इसके साथ ही लाखों नागरिकों के जीवन में शांति लौटी है। वह दिन दूर नहीं जब हमारे देश से माओवादी आतंक का पूरी तरह सफाया हो जाएगा।


