कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को संसद भवन परिसर में देशभर के किसान संगठनों के नेताओं से मुलाकात की। इस बैठक में भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू करने और किसानों व खेत मजदूरों की रोजी-रोटी बचाने की जरूरत पर बात हुई।
किसान नेताओं ने इस व्यापार समझौते का विरोध किया। उनका कहना था कि समझौते से मक्का, सोयाबीन, कपास, फल और मेवे उगाने वाले किसानों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा।
कांग्रेस के अनुसार, राहुल गांधी ने कहा कि इस समझौते से कृषि उत्पादों के आयात का रास्ता खुल गया है। आगे अन्य फसलें भी इससे प्रभावित हो सकती हैं।
राहुल गांधी से मिलने वालों में अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के प्रमुख सुखपाल एस खैरा, हरियाणा के भारतीय किसान मजदूर यूनियन के अशोक बलहारा, बीकेयू क्रांतिकारी के बलदेव एस जीरा, प्रोग्रेसिव फार्मर्स फ्रंट के आर. नंदकुमार, बीकेयू शहीद भगत सिंह के अमरजीत एस मोह्री, किसान मजदूर मोर्चा-इंडिया के गुरमनीत एस मंगत और जम्मू-कश्मीर जमीदारा फोरम के हमीद मलिक सहित कई अन्य नेता शामिल थे।
यह बैठक उस बयान के एक दिन बाद हुई, जिसमें राहुल गांधी ने कहा था कि सरकार उनके खिलाफ FIR दर्ज करे, केस करे या विशेषाधिकार प्रस्ताव लाए, लेकिन वे किसानों के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने PM नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के जरिए वे देश को बेच रहे हैं और किसान विरोधी हैं।
BJP सांसद निशिकांत दुबे ने गुरुवार को राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा में सब्सटेंसिव मोशन पेश किया है। उन्होंने राहुल पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है। दुबे ने राहुल की संसद सदस्यता खत्म करने और चुनाव लड़ने पर लाइफटाइम बैन लगाने की मांग की है।


