लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा है। उन्होंने सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिकों से जुड़े दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग की है।
25 फरवरी 2026 को लिखे लेटर में राहुल ने एक्स-सर्विसमेन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने और दिव्यांगता पेंशन पर लगाए गए नए आयकर प्रावधान को वापस लेने मांग की।
राहुल ने लिखा है कि एक्स-सर्विसमेन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम का उद्देश्य पूर्व सैनिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना है, लेकिन यह गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है।
उन्होंने कहा कि जिन्होंने देश की सेवा की, वे आज खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इस लेटर एक कॉपी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भी भेजी गई है।
केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने वाले नए आयकर नियमों के तहत पूर्व सैनिकों (Ex-servicemen) की दिव्यांगता पेंशन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया है। नए नियमों के अनुसार अब केवल उन सैनिकों की दिव्यांगता पेंशन कर-मुक्त रहेगी जिन्हें दिव्यांगता के कारण सेवा से ‘इनवैलिडेड आउट’ (invalided out) किया गया है।
1 अप्रैल 2026 से लागू नियमों के तहत केवल वही दिव्यांगता पेंशन टैक्स-फ्री होगी, जिन सैनिकों को चोट या दिव्यांगता के कारण समय से पहले सेवा से बाहर किया गया है।
जो सैनिक चोट या दिव्यांगता के बावजूद सेवा में बने रहे और अपनी निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु (superannuation) पूरी कर रिटायर हुए, उनकी ‘Impairment Relief’ (पूर्व में जिसे दिव्यांगता पेंशन कहा जाता था) अब आयकर के दायरे में आएगी।
अब तक 1922 से चली आ रही व्यवस्था के तहत सेवा-संबंधित सभी प्रकार की दिव्यांगता पेंशन पूरी तरह कर-मुक्त मानी जाती थी, चाहे सैनिक को सेवा से बाहर किया गया हो या वह नियमित सेवानिवृत्ति पर रिटायर हुआ हो।
इस फैसले का पूर्व सैनिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि यह कदम सैनिकों के मनोबल को प्रभावित करेगा, खासकर उन सैनिकों के लिए जिन्होंने चोट या दिव्यांगता के बावजूद सेवा जारी रखी और पूर्ण कार्यकाल पूरा किया।
विरोध करने वालों का तर्क है कि दिव्यांगता पेंशन राहत के रूप में दी जाती है, इसे आय नहीं माना जाना चाहिए। इसलिए इस पर कर लगाना गलत है और इससे दशकों पुरानी परंपरा टूटती है।


