सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कर्नाटक हाईकोर्ट को कन्नड़ एक्टर दर्शन थुगुदीपा को जमानत देने के फैसले पर दूसरी बार फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा- हाईकोर्ट ने रेणुकास्वामी मर्डर केस में ज्यूडिशियल पावर का गलत इस्तेमाल किया है।
इससे पहले 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से एक्टर दर्शन को मिली जमानत पर सवाल उठाए थे। इस दौरान कहा था कि लगता है हाईकोर्ट ने अपने विवेक का सही इस्तेमाल नहीं किया। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने एक्टर की जमानत रद्द करने का फैसला सुरक्षित रखा है।
दरअसल, एक्टर दर्शन को रेणुकास्वामी मर्डर केस में 13 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी, जिसके बाद वो जेल से रिहा हुए थे। इसी के खिलाफ कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को मार्च में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट बोला- ट्रायल कोर्ट से ऐसी गलती स्वीकार्य, हाईकोर्ट जज से नहीं
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने गुरुवार को कहा- वे हाईकोर्ट वाली गलती नहीं करेंगे। उन्होंने मुख्य आरोपी पवित्रा गौड़ा के वकील से कहा- हम दोषसिद्धि या बरी करने का कोई फैसला नहीं देंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के दिसंबर 2024 के जमानत आदेश की भाषा पर भी नाराजगी जताई। कहा- यह बहुत दुखद है। क्या हाईकोर्ट दूसरे मामलों में भी ऐसे आदेश देता है। खासकर यह कहना कि हत्या के मामले में गिरफ्तारी के आधार नहीं दिए गए। बेंच ने आगे कहा- ट्रायल कोर्ट के जज से ऐसी गलती स्वीकार्य हो सकती है, लेकिन हाईकोर्ट के जज से नहीं।
कन्नड़ एक्टर दर्शन थुगुदीपा पर फैन रेणुकास्वामी की हत्या का आरोप है। रेणुकास्वामी की लाश 9 जून को बेंगलुरु के कामाक्षीपाल्या इलाके के एक अपार्टमेंट के पास मिली थी। जब पुलिस ने क्राइम सीन के आसपास की जांच की तो उन्हें CCTV फुटेज में दर्शन और पवित्रा क्राइम सीन से निकलते दिखे। रात 11 बजे से 3 बजे तक दोनों के मोबाइल नंबर उसी एरिया में एक्टिव थे।
इसके बाद 11 जून को दर्शन और एक्ट्रेस पवित्रा की गिरफ्तारी की गई। पुलिस इस मामले में अब तक दर्शन और पवित्रा समेत 19 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। हालांकि, कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के बाद दर्शन जेल से रिहा हुए थे।


