प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी चार्जशीट में दावा किया है कि बिजनेसमैन और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा ने कथित अपराध के जरिए 58 करोड़ रुपए कमाए। उन्होंने इस रकम का इस्तेमाल प्रॉपर्टी खरीदने, इन्वेस्टमेंट और अपने ग्रुप की कंपनियों को लोन दिया और उनके कर्ज चुकाने में किया।
ED के मुताबिक, वाड्रा को करीब 5 करोड़ रुपए ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड (BBTPL) के जरिए मिले। बाकी 53 करोड़ रुपए स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (SLHPL) के जरिए आए।
एजेंसी के मुताबिक, यह सारा पैसा अपराध से जुड़ी गतिविधियों से कमाया गया था और इसे बाद में अलग-अलग इन्वेस्टमेंट और प्रॉपर्टी खरीदने में लगाया गया।
जांच में हुआ खुलासा
अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान बैंक लेन-देन, कंपनी रिकॉर्ड और गवाहों के बयान के आधार पर यह ट्रांजैक्शन ट्रैक किया गया। जिन कंपनियों के जरिए धन आया, उनका संचालन वाड्रा के नजदीकी सहयोगियों के हाथों में था। इन चैनलों का उपयोग रकम को कानूनी स्वरूप देने के लिए किया गया।
ED ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है और अब इस पर सुनवाई होगी। अगर कोर्ट आरोप तय करती है, तो वाड्रा को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत सजा मिल सकती है। फिलहाल वाड्रा ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
गुरुग्राम लैंड डील में रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ चार्जशीट दायर
हरियाणा के गुरुग्राम लैंड डील केस में एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने 17 जुलाई को रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। यह चार्जशीट लैंड डील से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में पेश की गई थी।
यह पहली बार था जब किसी जांच एजेंसी ने किसी आपराधिक मामले में वाड्रा के खिलाफ चार्जशीट दायर की। वाड्रा के अलावा इस चार्जशीट में कई अन्य लोगों के साथ कंपनियों के नाम भी शामिल हैं। उनकी 37.64 करोड़ रुपए की संपत्ति भी अटैच की गई है।
क्या था पूरा मामला…
मामला सितंबर 2008 का है। जो गुरुग्राम के शिकोहपुर (अब सेक्टर 83) लैंड डील से जुड़ा हुआ है। इस केस में रॉबर्ट वाड्रा के साथ हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ और एक प्रॉपर्टी डीलर के खिलाफ साल 2018 में FIR दर्ज की गई थी। FIR में भ्रष्टाचार, जालसाजी और धोखाधड़ी सहित अन्य आरोप लगाए गए हैं।


