सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर वाली NCERT के 8वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब बैन कर दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने किताब छापने और बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया। साथ ही कहा कि जो किताबें छप चुकी हैं, उसे जब्त कीजिए और डिजिटल कॉपियों को भी हटाइए।
कोर्ट ने इस मामले में NCERT डायरेक्टर और केंद्रीय शिक्षा सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सिलेबस से जुड़ी बैठकों की कार्यवाही और विवादित चैप्टर लिखने वाले लेखकों के नाम और उनकी योग्यता बताने को भी कहा है।
CJI ने कहा- यह न्यायपालिका को बदनाम करने की गहरी और सोची-समझी साजिश लगती है। जिम्मेदारों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। गहराई से जांच होगी और केस बंद नहीं होगा। NCERT पर अवमानना की कार्रवाई भी हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि विवादित चैप्टर को तैयार करने में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार न्यायपालिका का पूरा सम्मान करती है और उसका अपमान करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खुद नोटिस लिया है। अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी। बुधवार को CJI की फटकार के बाद NCERT ने इस मामले में माफी मांग ली थी।
इस मामले में सरकारी सूत्रों ने कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित आंकड़े संसदीय अभिलेखों और नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड में मौजूद हैं, लेकिन फैक्ट्स के क्रॉस वेरिफिकेशन के लिए केंद्र से परामर्श नहीं लिया गया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि NCERT में सुप्रीम कोर्ट और भारत के न्याय सिस्टम का जिक्र चिंता की बात है। जब यह बात हमें पता चली, तो हमने NCERT से किताबों का रिव्यू करवाया।
प्रधान ने कहा- मैं इस पर अफसोस जाहिर करता हूं। NCERT के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार यह पक्का करेगी कि ऐसी स्थिति दोबारा न हो।
वहीं, इस विवाद कांग्रेस ने कहा कि पाठ्यपुस्तकों में बदलाव RSS से प्रेरित हैं और सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी सही है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पिछले 10 साल में NCERT की किताबों को जिस तरह बदला गया है, वह गलत और खतरनाक है। इसकी जांच की जानी चाहिए।
NCERT ने 23 फरवरी को जारी नई टेक्स्टबुक ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ में ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ टॉपिक के अंदर ज्यूडिशियरी में करप्शन का टॉपिक जोड़ा है। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्कूलों में पढ़ाई जानी है।
सोशल साइंस की इस किताब में लिखा गया है- ‘Justice delayed is justice denied’, यानी इंसाफ में देरी नाइंसाफी की तरह है। यहां सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट्स में 62 लाख 40 हजार, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है।


