कर्नाटक के CM सिद्धरमैया ने शनिवार को मनरेगा स्कीम की जगह लाए गए विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट (VB-G RAM G) की आलोचना की। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी को पहली बार गोडसे ने मारा था। लेकिन मनरेगा को खत्म करके केंद्र सरकार ने दूसरी बार महात्मा गांधी को मारा है।
बेंगलुरु के एक कार्यक्रम में सिद्धरमैया ने कहा कि मनरेगा का मकसद गरीब और छोटे किसानों को फायदा पहुंचाना था, लेकिन मोदी सरकार ने राज्यों से सलाह किए बिना यह फैसला लिया, जो तानाशाही रवैया दिखाता है।
सिद्धारमैया ने BJP और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर महिलाओं, दलितों का विरोध करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा- मनरेगा को खत्म करके वे कॉर्पोरेट हितों की मदद कर रहे हैं और ग्रामीण आजीविका को नष्ट कर रहे हैं। यह VB Ram G बिल खत्म कर देना चाहिए और मनरेगा स्कीम को फिर से शुरू करने की जरूरत है।
दरअसल, संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा से VB-G RAM G बिल पास कराया था। इसके बाद 21 दिसंबर को राष्ट्रपति से बिल को मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन गया था।
देश भर में इस स्कीम के तहत लगभग 12.17 करोड़ मजदूर एनरोल हैं, जिनमें 6.21 करोड़ महिलाएं शामिल हैं, जो वर्कफोर्स का लगभग 53.61% हैं। मनरेगा अनुसूचित जाति के लगभग 17% और अनुसूचित जनजाति के 11% मजदूरों हैं।
अकेले कर्नाटक में 71.18 लाख एक्टिव मनरेगा मजदूर हैं, जिनमें से 36.75 लाख महिलाएं हैं, जो वर्कफोर्स का 51 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा हैं। इस स्कीम ने आम लोगों को इज्जत से जीने दिया और खेती के काम को रोजगार गारंटी प्रोग्राम के साथ जोड़कर गांव की इकोनॉमी को मजबूत किया।
ये कानून संसद में जल्दबाजी में पास कराया गया। 17 दिसंबर को पेश किया गया और अगले ही दिन बिना किसी बहस या फेडरल सलाह के पास कर दिया गया। यह कदम ग्राम सभाओं और ग्राम पंचायतों से उनके वैधानिक अधिकार छीनता है
पहले मजदूरी का 100% केंद्र सरकार देती थी। अब केंद्र मजदूरी का 60% देगा और राज्य सरकारों को बाकी 40% देना होगा। आर्टिकल 280(3) के मुताबिक यह संविधान के खिलाफ है। ग्राम सभाओं और ग्राम पंचायतों के जो अधिकार थे, उन्हें केंद्र ने छीन लिया है।
मनरेगा ने आम लोगों को सम्मान के साथ जीने का मौका दिया और कृषि कार्य को रोजगार गारंटी कार्यक्रमों के साथ जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।

