सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को कहा कि राज्य सरकारों या राज्य चुनाव आयोगों की तरफ से नियुक्त कर्मचारियों को SIR की ड्यूटी निभानी होगी। अगर किसी के पास ड्यूटी से छूट मांगने का कोई खास कारण है, तो राज्य सरकार उनकी अपील पर विचार करके उनकी जगह दूसरे कर्मचारी को नियुक्त कर सकता है।
भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारी SIR सहित दूसरे वैधानिक कामों को करने के लिए बाध्य हैं। राज्य सरकारों का भी कर्तव्य है कि वे चुनाव आयोग (EC) को कर्मचारी उपलब्ध कराएं।
कोर्ट ने कहा कि अगर SIR काम में लगे बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO) के पास काम का बोझ ज्यादा है, तो राज्यों को और स्टाफ को काम पर लगाना चाहिए। बेंच ने कहा- इससे BLO के काम के घंटे कम करने में मदद मिलेगी और पहले से ही नियमित काम के अलावा SIR कर रहे अधिकारियों पर दबाव कम होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी साउथ एक्टर विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की। TVK की याचिका में कोर्ट से EC को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि वह समय पर काम पूरा नहीं करने वाले BLO के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करे।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में 2 दिसंबर को पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और अन्य राज्यों में वोटर्स लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी।
राज्यों सरकारों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को सलाह दी कि वह केरल में स्थानीय निकाय चुनावों की चल रही तैयारियों को देखते हुए SIR फॉर्म जमा करने की समय सीमा को और बढ़ा दे।
बेंच ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों के पास भरे हुए फॉर्म अपलोड करने के लिए पर्याप्त समय होना चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा- इसे और आगे बढ़ाया जाए ताकि जो लोग इससे वंचित रह गए हैं, उन्हें भी मौका मिल सके।
चुनाव आयोग ने 30 नवंबर को SIR की समय सीमा एक सप्ताह बढ़ाने का फैसला किया था। आयोग ने कहा था कि अब अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
मतदाता जोड़ने-हटाने का एन्यूमरेशन पीरियड यानी वोटर वेरिफिकेशन अब 11 दिसंबर तक चलेगा। पहले 4 दिसंबर की समय सीमा थी। वहीं, पहले ड्राफ्ट लिस्ट 9 दिसंबर को जारी होनी थी, लेकिन अब इसे 16 दिसंबर को जारी किया जाएगा।


