केंद्र सरकार ने दर्द और बुखार में इस्तेमाल होने वाली निमेसुलाइड (Nimesulide) दवा के 100 मिलीग्राम से अधिक डोज की सभी ओरल (खाने वाली) दवाओं की मैन्यूफैक्चरिंग और बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक निमेसुलाइड एक नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा है। जो दर्द तो कम करती है, लेकिन इसकी ज्यादा डोज से लिवर खराब होने का खतरा रहता है।
यह प्रतिबंध केवल अधिक डोज (100 मिलीग्राम) वाली निमेसुलाइड पर लागू होगा। जबकि कम डोज की दवाएं मिलती रहेंगी। निमेसुलाइड ब्रांड बेचने वाली दवा कंपनियों को अब ज्यादा डोज वाली दवाओं का प्रोडक्शन बंद करना होगा। जो दवाइयां पहले से बाजार में मौजूद हैं उन्हें वापस मंगाना होगा।
निमेसुलाइड दवा के जानवरों के इस्तेमाल पर 11 महीने पहले ही रोक लगा दी गई थी। 20 फरवरी 2025 को सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था। हालांकि जानवरों के लिए सभी तरह की निमेसुलाइड बैन की गई हैं। जबकि इंसानों के लिए सिर्फ हाई डोज पर बैन लगा है।
पैरासिटामॉल सहित 53 दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल पाई गई हैं। इनमें विटामिन, शुगर और ब्लड प्रेशर की दवाओं के अलावा एंटीबायोटिक्स भी शामिल हैं। देश की सबसे बड़ी ड्रग रेगुलेटरी बॉडी सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने इसकी लिस्ट जारी की है।

