शिवसेना उद्धव के मुखपत्र सामना में प्रधानमंत्री मोदी और महाराष्ट्र सीएम देवेंद्र फडणवीस की तारीफ की गई है। लेकिन डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे पर निशाना साधा गया है। मुखपत्र में महाराष्ट्र के इंफ्रॉस्ट्रक्चर, भ्रष्टाचार और पॉलिटिक्स पर लिखा गया है।
मुखपत्र में लिखा गया- एकनाथ शिंदे का पैसे जमा करने वाला मुख्य व्यक्ति 10 हजार करोड़ लेकर दुबई भाग गया। क्योंकि फडनवीस ने राज्य में गलत काम करने वालों को साफ करने का फैसला लिया है। शिंदे के CM रहने के दौरान हुए काले कारनामों को खत्म करने का पवित्र कार्य शुरू हो गया है।
सामना में लिखा गया है कि CM फडणवीस ने मंत्रियों ने उनके OSD और PS नियुक्त करने का अधिकार छीनकर उचित कदम उठाया है। डिसिप्लिन लाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं।
3 सालों में भ्रष्टाचार का गटर बहता रहा
देवेंद्र फडणवीस ने शासन में अनुशासन लाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। पिछले 3 सालों में भ्रष्टाचार का गटर बहता रहा। जिसके चलते महाराष्ट्र जैसे राज्य की राजनीति सड़ गई। आर्थिक अनुशासनहीनता चरम पर पहुंच गई।
विधायकों, सांसदों, नगरसेवकों, सच्चे शिवसेना पदाधिकारियों को खरीदने और फिर पालने के लिए आवश्यक धन सड़कों, निर्माण ठेकेदारों, MMRDA, MMRDC, MAHDA, SRA, शहरी विकास विभाग को लूटकर इकट्ठा किया गया।
कई लोगों ने लूटे गए पैसे उनकी जेब में आ जाएं इसी उद्देश से दल बदला। धन का यह प्रवाह कहां से आया? यह धन फर्जी टेंडर्स, फर्जी कार्यों, धन आवंटन में कमीशन, लैंड स्कैम, गृहनिर्माण में दलाली जैसे ‘आशर’ तरीकों से जुटाया गया।
ताजा खबर है कि शिंदे के मुख्य कलेक्टर (आशर प्रा. लिमिटेड) दस हजार करोड़ रुपए लेकर दुबई भाग गए। अगर शिंदे और उनके लोगों की हालत पतली नहीं हो तो आश्चर्य है।
500 करोड़ का टेंडर 3 हजार करोड़ का, पैसे खाए
500 करोड़ का टेंडर बढ़ाकर 3 हजार करोड़ कर देना। बीच के हजार करोड़ रुपए काम शुरू होने से पहले ले लेना, उसमें से 100-200 करोड़ चेलों में बांट देना और सभी को प्रयाग तीर्थ में गंगा स्नान कराने ले जाना।
मंत्रियों ने PA और OSD के जो नाम पास करने के लिए CM के पास भेजे, उनमें से 16 नाम मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर नकार दिए। क्योंकि ये 16 लोग पिछली शिंदे सरकार में मंत्रियों के OSD बनकर दलाली और फिक्सिंग कर रहे थे।
इन फिक्सर्स को CM फडणवीस ने खारिज कर दिया। मंत्रियों के PA और OSD नियुक्त करने की शक्तियां छीन लीं। फिक्सर’ की नियुक्ति नहीं होने देने की मुख्यमंत्री की भूमिका उचित है।


