जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पूरे देश में गुस्से की लहर है। 26 नागरिकों की निर्मम हत्या के बाद पाकिस्तान को लेकर गुस्सा है।
इसी बीच भारत के पूर्व उच्चायुक्त अजय बिसारिया ने युद्ध के खतरों और तैयारियों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का फैसला जनता की भावनाओं पर नहीं, बल्कि रणनीतिक सोच पर आधारित होना चाहिए।
सबसे बुरे हालात के लिए तैयार रहना होगा: बिसारिया
अजय बिसारिया ने कहा कि अगर भारत ने सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना, तो हालात बहुत बिगड़ सकते हैं और मामला एक बड़े युद्ध तक पहुंच सकता है।
उन्होंने कहा कि जब आप किसी टकराव को आगे बढ़ाते हैं, तो आपको सबसे बुरे हालात के लिए तैयार रहना चाहिए। इसका मतलब है कि देश को एक बड़े युद्ध के लिए भी तैयार रहना होगा। जिसमें सिर्फ सेना की ताकत ही नहीं, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व की हिम्मत और पूरे देश की एकता भी बहुत जरूरी होगी।
सरीन बोले- अगर इस्लामाबाद असुरक्षित है, तो दिल्ली भी होगी
रणनीतिक मामलों के जानकार सुशांत सरीन ने कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच जंग होती है, तो इसका असर दोनों देशों के बड़े शहरों पर पड़ेगा।
उन्होंने समझाया कि दोनों देशों के पास मिसाइलें और परमाणु हथियार हैं और अगर हालात ज्यादा बिगड़ते हैं तो दोनों तरफ भारी नुकसान हो सकता है।
भारत विरोधी प्रचार कर पाक चैनल पैसा नहीं कमा सकते
सुशांत सरीन ने कहा कि भारत सरकार ने जो पाकिस्तानी यूट्यूब चैनलों और क्रिएटर्स को बैन किया है, वह एक सही कदम है। उन्होंने बताया कि अभी हालात सामान्य नहीं हैं। ऐसे समय में कोई पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर भारत के खिलाफ जहर फैलाए और यहीं से पैसा भी कमाए। ऐसा नहीं होना चाहिए।
बिसारिया कनाडा- पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रह चुके हैं
अजय बिसारिया रणनीतिक सलाहकार और पूर्व राजनयिक हैं। उन्होंने 35 साल तक भारतीय विदेश सेवा में काम किया और कनाडा, पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रह चुके हैं। बिसारिया ने रूस, यूक्रेन और मध्य एशिया के साथ भारत के रिश्तों को मजबूत किया।
वे OMERS और अन्य कंपनियों को निजी इक्विटी, फिनटेक, हेल्थ टेक आदि में सलाह देते हैं और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) में फेलो हैं। उन्होंने वाशिंगटन, डीसी में विश्व बैंक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। बिसारिया की शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय और प्रिंसटन विश्वविद्यालय से है। उनकी वैश्विक कूटनीति और रणनीतिक सलाह के लिए अहम योगदान हैं।


