Palwal ( अतुल्य लोकतंत्र ) मुकेश बघेल / प्रेस वार्ता के दौरान जानकारी देते हुए डीएसपी ट्रैफिक संदीप मोर ने बताया कि पुलिस कप्तान श्री लोकेंद्र सिंह के संज्ञान में आया था कि ई चालान में तैनात पुलिसकर्मी पिछले कई वर्षों से सरकारी पैसे को सरकारी बैंक खाते में जमा न करके निजी खर्च में ले रहें हैं। जिसकी जांच कप्तान ने उन्हें सौंपी और जांच के दौरान उन्होंने पाया कि चालान विंडो पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा ई चालानी राशि की कुल रकम 3 करोड़ 22 लाख 97 हजार 150 रुपये का बैंक की फर्जी स्टेटमेंट एवं मोहर का उपयोग कर गबन किया गया है।
इसके अलावा जून माह 2020 में विभिन्न चौकी थानों में ई चालानी मशीन द्वारा काटे गए चालानों की कुल राशि 138500 रुपये बैंक खाते में जमा नहीं कराये गए। इसी प्रकार अक्टूबर माह में 139000 रुपये किसी भी खाते में जमा नहीं कराये गए और न ही पर्चियों का मिलान हो सका जिसके चलते फर्जी चालान पर्ची बनाये जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता जिसकी जांच भी जारी है। इस दौरान प्रधान सिपाही जनक की तैनाती ब्रांच में थी। डीएसपी ने बताया की इसके उपरांत उक्त शाखा में ईएचसी ओमबीर की तैनाती के दौरान एक अगस्त 2021 से 31 अगस्त 2021 तक चालानों के माध्यम से विभाग को 14 लाख 76 हजार 200 रुपये प्राप्त हुई जिसमें से कर्मचारियों ने 14500 रूपये कम जमा कराये।
इस तरह एक अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक चलन शाखा में 1418900 रुपये प्राप्त हुए जिसमें आरोपियों द्वारा बैंक को 1800 रुपये ज्यादा जमा (1420700) कराने पाए गए। उन्होंने बताया की जांच के दौरान प्रधान सिपाही जनक की तैनाती के दौरान कुल 3 करोड़ 22 लाख 97 हजार 150 रुपये सरकारी खाते में जमा नहीं कराये गए जबकि ईएचसी ओमबीर की तैनाती के दौरान 12700 रुपये सरकारी खाते में जमा नहीं कराये गए। डीएसपी मोर ने बताया की उक्त दोनों पुलिसकर्मियों ने नियमों की जानकारी होने के बावजूद अपने पद का दुरूपयोग कर सरकारी पैसा ( कुल ₹32309850) को सरकारी खाते में जमा न करवाकर अपने निजी काम में प्रयोग कर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुँचाया है जिसके चलते दोनों पुलिसकर्मी आरोपियों जनक व ओमबीर के खिलाफ आईपीसी एवं भ्रष्टाचार अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है व मुख्य आरोपी हेड कांस्टेबल जनक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
डीएसपी पलवल विजय पाल सिंह के नेतृत्व में मामले की जांच अभी जारी है गिरफ्तार आरोपी को पेश अदालत कर 5 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान गबन की गई राशि की बरामदगी के प्रयास किए जाएंगे तथा मामले में अन्य की संलिप्तता के बारे में गहन पूछताछ की जाएगी। मामले में जुड़े किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। मामले में दूसरे आरोपित पुलिसकर्मी ओमबीर के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी है।


