फरीदाबाद। नवरात्रि के चौथे दिन महारानी वैष्णो देवी मंदिर में मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की भव्य रूप से पूजा अर्चना की गई। मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने प्रातः कालीन आरती हवन और यज्ञ का शुभारंभ करवाया तथा मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं को नवरात्रों की शुभकामनाएं और बधाई दी। चौथे नवरात्रि पर माता कुष्मांडा के दरबार में नगर निगम फरीदाबाद की मेयर प्रवीण बत्रा जोशी विशेष रूप से आरती और हवन यज्ञ में शामिल होने के लिए पहुंची। श्रीमती जोशी ने मंदिर में माता के समक्ष माथा टेका और ज्योत प्रज्वलित की।
इस अवसर पर मंदिर संस्थान के प्रधान जगदीश भाटिया ने मेयर श्रीमती प्रवीण बत्रा जोशी को माता रानी की चुनरी और प्रसाद भेंट किया। माता रानी की पूजा अर्चना करने के बाद मेयर श्रीमती जोशी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को नवरात्रों की शुभकामनाएं दी और कहा कि माता रानी की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इसलिए वह भी अपने शहर प्रदेश और देश की उन्नति तथा सुख शांति के लिए माता कुष्मांडा के दरबार में पूजा अर्चना करने के लिए आई है।
हवन यज्ञ उपरांत मंदिर के प्रधान जगदीश भाटिया ने श्रद्धालुओं को मां दुर्गा के चौथे स्वरूप माता कुष्मांडा की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि माता कुष्मांडा को मंद मुस्कान से ब्रह्मांड उत्पन्न करने वाली ‘अंडज’ देवी माना जाता है। इस दिन पीले या नारंगी वस्त्र पहनकर, माता को हल्दी मिश्रित जल, पीले फूल, और मालपुए का भोग अर्पित करने से स्वास्थ्य, ऊर्जा और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। घर के पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर माता कूष्मांडा की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें। माता को कुमकुम, अक्षत, रोली, और लाल/पीले फूल (गुड़हल या गुलाब) अर्पित करें। माता को मालपुआ, केसर वाला पेठा, या दही का भोग लगाया जाता है।
माता रानी की पूजा करने के अवसर पर ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे नमः” या “या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता” मंत्र का 108 बार जाप करे, जिससे आपको पूजा का पूर्ण फल मिलेगा। अंत में कपूर या घी के दीपक से माता की आरती करें।
श्री भाटिया ने बताया कि मां कूष्मांडा सूर्य के समान ऊर्जा प्रदान करती हैं, इसलिए इनकी पूजा से कुंडली में सूर्य दोष दूर होता है। माता कूष्मांडा सभी प्रकार के भय, रोग और कष्टों का नाश करती हैं। श्री भाटिया ने कहा कि जो भी भक्त सच्चे मन से माता रानी की पूजा अर्चना कर अपने मन की मुराद मांगते हैं वह अवश्य पूर्ण होती है।


