सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को उनके पैरेंट कोर्ट (इलाहाबाद हाईकोर्ट) वापस ट्रांसफर की सिफारिश का प्रस्ताव जारी किया। CJI संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने ये सिफारिश की है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। 23 मार्च को ही जस्टिस वर्मा से दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्यभार वापस लिया था।
वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। 23 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को वापस इलाहाबाद भेजने की बात की इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने विरोध किया था।
बार ने जनरल हाउस मीटिंग बुलाई थी। जिसमें जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की मांग का प्रस्ताव पारित किया गया था। साथ ही मामले की जांच ED और CBI से कराने की मांग का भी प्रस्ताव पारित किया था। प्रस्ताव की कॉपी सुप्रीम कोर्ट CJI को भी भेजी गई है।
23 मार्च: कैश कांड के लिए 3 सदस्यीय कमेटी बनी
सुप्रीम कोर्ट के CJI संजीव खन्ना के आदेश पर कैश कांड की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई। इसमें जस्टिस शील नागू (पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस), जी एस संधावालिया (हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस) और कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस अनु शिवरामन शामिल हैं।
मामले की जांच कितने समय में पूरी होनी है, फिलहाल यह तय नहीं किया गया है। अगर जांच कमेटी इस नतीजे पर पहुंचती है कि आरोप सही हैं, तो जस्टिस वर्मा को हटाने की कार्यवाही शुरू करने के लिए CJI संजीव खन्ना ये कदम उठा सकते हैं…
CJI संजीव खन्ना जस्टिस वर्मा को इस्तीफा देने या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने की सलाह दे सकते हैं।
अगर जस्टिस वर्मा CJI की सलाह को नहीं मानते हैं तो वे दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को उन्हें कोई काम न देने का आदेश जारी करेंगे।
इसके बाद CJI, राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री को तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट देकर उसके नतीजे बताएंगे। जिसके बाद जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की कार्यवाही शुरू हो सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा का भी पक्ष
रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा का पक्ष भी है, जिसमें उन्होंने कहा है कि जिस स्टोर रूम में नोटों की गड्डियां मिलने की बात की जा रही है, वहां उन्होंने या उनके परिवार ने कभी कोई पैसा नहीं रखा। वो एक ऐसी खुली जगह है, जहां हर किसी का आना-जाना होता है। उन्हें इस मामले में फंसाया जा रहा है।
दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय ने इंटरनल इन्क्वायरी के बाद सुप्रीम कोर्ट को 21 मार्च को रिपोर्ट सौंपी थी। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा को ज्यूडिशियल काम देने से मना कर दिया है। अब जस्टिस वर्मा के 6 महीने की कॉल डिटेल्स की जांच की जाएगी।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बोले- किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहित माथुर ने कहा- मैं मानता हूं कि बार एसोसिएशन जजों के जज के तौर पर काम करता है। जस्टिस वर्मा के खिलाफ आजतक किसी भी वकील से मुझसे शिकायत नहीं की।
उन्होंने कहा- जस्टिस वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट के बेहतरीन जजों में से एक हैं। हालांकि, उन पर लग रहे आरोप और पब्लिक डोमेन में चल रहे सबूत बेहद गंभीर हैं। वीडियो क्लिप साफ नहीं है, इसलिए किसी फैसले पर आना जल्दबाजी होगी।


