फरीदाबाद। आज का उपभोक्ता केवल शोषित नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से ठगा जा रहा है। कुछ उद्योगपति अपने फायदे के लिए चार-पांच पन्नों की नियमावली थमाकर एक ऐसा ‘ स्वयंभू संविधान’ थोप देते हैं, जिसमें अधिकारों से ज्यादा पाबंदियां होती हैं। कार कंपनियों से लेकर होम अप्लायंसेस बनाने वाली कंपनियां तक अपने बनाए नियमों के सहारे उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डाल रही हैं, जो बंद होना चाहिए। यह विचार मिशन जॉर्नलिस्ट प्रोटेक्शन, भारत के अध्यक्ष एवं सहकारी भारती हरियाणा के प्रांत मीडिया प्रमुख विष्णु चौहान ने विशेष साक्षात्कार के दौरान व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि कुछ कार कंपनियों की बात करें तो गाड़ी बेचते समय लंबी-चौड़ी गारंटी और भरोसे का वादा किया जाता है, लेकिन जैसे ही समय बीतता है या कोई तकनीकी खराबी सामने आती है, कंपनियां तुरंत अपने नियमों की आड़ ले लेती हैं। “यह पार्ट वारंटी में नहीं है”, “यह यूज़र की गलती है”, “यह सामान्य घिसावट है”—इन बहानों के जरिए लाखों रुपये खर्च करने वाले उपभोक्ता को ही दोषी ठहरा दिया जाता है। सर्विस सेंटर के चक्कर काटते-काटते उपभोक्ता थक जाता है, लेकिन समाधान नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि कई मामलों में देखा गया है कि कंपनी के सर्विस प्रोवाइडर वर्षों तक उपभोक्ता को घुमाते है और बाद में गारंटी समय समाप्त बता कर पल्ला झाड़ लेते हैं।
उन्होंने कहा यही हाल होम अप्लायंसेस—फ्रिज, एसी, वॉशिंग मशीन, टीवी—का भी है। कंपनियां गारंटी और वर्षों की वारंटी का लालच देती हैं, लेकिन जब उत्पाद खराब होता है तो असली खेल सामने आता है। “कंप्रेसर वारंटी”, “मोटर वारंटी”, “कार्ड वारंटी” शब्दों के पीछे छिपी चालबाजी से उपभोक्ता को भारी रकम चुकाने पर मजबूर किया जाता है। जो सेवाएं पहले ‘फ्री’ बताई जाती हैं, वही बाद में महंगी शर्तों के साथ जोड़ी जाती हैं।
श्री चौहान ने कहा कि उपभोक्ता का सबसे बड़ा शोषण ‘सर्विस’ के नाम पर होता है। सर्विस के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है। मामूली खराबी को बड़ा दिखाकर उपभोक्ता से हजारों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं। अधिकृत सर्विस सेंटर का डर दिखाकर उपभोक्ता को मजबूर किया जाता है कि वह कहीं और न जाए।
उन्होंने कहा यह एक संगठित लूट है, जो नियमों की आड़ में खुलेआम चल रही है।
इन नियमों की सबसे खतरनाक बात यह है कि इन्हें इतनी जटिल भाषा में लिखा जाता है कि आम आदमी उन्हें समझ ही नहीं पाता। यह एक सुनियोजित ‘कानूनी जाल’ है, जिसमें उपभोक्ता फंसकर रह जाता है और उद्योगपति बेखौफ मुनाफा कमाते रहते हैं।
इस पूरे मुद्दे पर विष्णु चौहान, प्रांत प्रमुख, सहकार भारती हरियाणा ने उपभोक्ताओं की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए तीखे शब्दों में कहा कि अब इस मनमानी पर नकेल कसना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो उपभोक्ताओं का शोषण और बढ़ेगा।
उन्होंने सरकार और संबंधित एजेंसियों के लिए ठोस मांग करते हुए कहा कि वारंटी और गारंटी की सभी शर्तों को सरल और स्पष्ट भाषा में लिखना अनिवार्य किया जाए, ताकि कोई कंपनी भ्रम फैलाकर बच न सके एवं सर्विस के नाम पर की जा रही मनमानी वसूली पर सख्त नियंत्रण हो और हर सर्विस का रेट सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने कहा यदि कोई कंपनी वारंटी देने से बचती है या उपभोक्ता को गुमराह करती है, तो उस पर भारी जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई हो व उपभोक्ता अदालतों में मामलों का निपटारा तय समयसीमा—अधिकतम 6 महीने—में किया जाए।
उन्होंने कहा कि, “राइट टू रिपेयर” लागू कर कंपनियों की एकाधिकारवादी प्रवृत्ति को खत्म किया जाए, ताकि उपभोक्ता को सस्ती और स्वतंत्र मरम्मत का अधिकार मिल सके व बार-बार शिकायत मिलने पर संबंधित कंपनी का लाइसेंस तक रद्द करने का प्रावधान किया जाए
श्री चौहान ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अब केवल ‘ग्राहक भगवान है’ का नारा देने से काम नहीं चलेगा। जब तक नियमों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सख्ती नहीं आएगी, तब तक उपभोक्ता इसी तरह पिसता रहेगा।
समय की मांग है कि उद्योगपतियों के इस ‘नकली संविधान’ को तोड़कर उपभोक्ताओं को उनके वास्तविक अधिकार दिलाए जाएं। अगर अब भी चुप्पी रही, तो यह शोषण व्यवस्था और मजबूत होती जाएगी—और इसका खामियाजा हर आम नागरिक को भुगतना पड़ेगा।


