फरीदाबाद। फरीदाबाद के मुजेसर क्षेत्र के जीवन नगर पार्ट-2 में सरूरपुर और गोछी इलाके में जिला नगर योजनाकार विभाग ने बुधवार को अवैध कब्जों और अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कई घरों और दुकानों को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई भारी पुलिस बल की मौजूदगी में की गई। डीटीपी यजन चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि इन इलाकों में कुछ लोगों द्वारा बिना अनुमति के अवैध निर्माण किया गया था और भू-माफियाओं द्वारा अवैध कॉलोनियां काटी जा रही थीं।
विभाग की ओर से पिछले लगभग एक साल से कब्जाधारियों को नोटिस देकर जमीन खाली करने और निर्माण हटाने के लिए कहा जा रहा था, लेकिन किसी ने भी आदेश का पालन नहीं किया। इसके बावजूद कुछ लोगों ने नए घर और दुकानें भी बना लीं। इसी कारण विभाग को मजबूर होकर कार्रवाई करनी पड़ी। अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई के दौरान लगभग 4 से 6 अवैध घरों को तोड़ा गया, जबकि करीब 8 से 9 दुकानों को भी ध्वस्त किया गया। विभाग का कहना है कि यहां रहने वाले कई लोगों ने बिना रजिस्ट्री और बिना सरकारी अनुमति के जमीन खरीदकर निर्माण कर लिया था। कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने विरोध भी किया, लेकिन पुलिस की निगरानी में ये कार्रवाई की गई।
वहीं, जिन लोगों के घर और दुकानें तोड़ी गईं, उनमें सोनू और जितेंद्र कुमार सहित कई स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया और अचानक प्रशासन पुलिस बल और जेसीबी के साथ पहुंचकर तोडफ़ोड़ शुरू कर दी। उनका कहना है कि जमीन मालिकों ने जीपीए (पावर ऑफ अटॉर्नी) के माध्यम से सस्ती जमीन का लालच देकर प्लॉट बेचे थे। कुछ प्रभावित लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि कॉलोनी अवैध थी तो वहां बिजली के कनेक्शन और मीटर क्यों लगाए गए तथा गलियों में टाइलें क्यों बिछाई गईं। लोगों का कहना है कि जब सुविधाएं दी जा रही थीं, तब प्रशासन ने अवैधता पर रोक क्यों नहीं लगाई।
डीटीपी यजन चौधरी ने लोगों से अपील की कि जमीन खरीदने से पहले उसकी वैधता की पूरी जांच अवश्य करें। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करें कि जमीन की रजिस्ट्री हो सकती है या नहीं, बेचने वाला असली मालिक है या नहीं और कॉलोनी अधिकृत है या नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि जो लोग दूसरों को बहला-फुसलाकर अवैध जमीन बेचते हैं, उनके खिलाफ विभाग द्वारा एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाती है। गरीब और अनजान लोगों को अक्सर सस्ती जमीन का लालच देकर ठगा जाता है, जिससे बाद में ऐसी कार्रवाई करनी पड़ती है।


