फरीदाबाद। …या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्मांडा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। के भाव से चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन सूरजकुंड मार्ग स्थित श्रीलक्ष्मी नारायण दिव्यधाम-श्रीसिद्धदाता आश्रम के सत्संग भवन में चल रहे आदिशक्ति मां दुर्गा के नौ दिवसीय अनुष्ठान में देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने आदिशक्ति मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरुप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की। वेदवेदांग आचार्यो द्वारा किए गए देवी पुराण महाभागवत के मंत्रोच्चार के साथ युवाचार्य स्वामी अनिरुद्धाचार्य जी ने विश्व कल्याण की विशेष-पूजा-अर्चना की। आयोजित अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने सुख-संपत्ति व समृद्धि की प्राप्ति के लिए मां कूष्मांडा की पूजा की। ब्रह्मांड की रचना करने वाली मां कूष्मांडा के दर्शन और पूजा के लिए श्रद्धालु सुबह से ही दिव्यधाम पहुंचने लगे।
महिलाओं ने देवी को सुहाग सामग्री चढ़ाकर पूजा-अर्चना की। श्री सिद्धदाता आश्रम के अधिष्ठाता एवं श्रीसिद्धदाता आश्रम के अधिष्ठाता एवं श्रीरामानुज संप्रदाय की तीर्थ पीठ इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा के पीठाधीश्वर अनंतश्री विभूषित श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कूष्मांडा मां की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि जब सृष्टि का विस्तार नहीं था। उस समय मां के कुष्मांडा रूप ने अपने उदर से सृष्टि का विस्तार किया। मां का कुष्मांडा स्वरूप अन्नपूर्णा का है। मां के इस रूप का संदेश है कि आवश्यकता नहीं होती तो जग नहीं होता। जग नहीं होता तो कुछ नहीं होता। देवी ने भक्तों को भूख, इच्छा शक्ति का आभास कराया। उन्होंने कहा कि मां की अराधना को भक्त उदर की ज्वाला से जोड़ सकते हैं।
माता का कुष्मांडा रूप तृप्ति और वृत्ति का प्रतीक है। कई प्रकार के रस, आहार, प्रकृति के उपहार माता के इस स्वरुप की स्तुति से जुड़े हैं। महिसाषुर वध के बाद देवताओं ने देवी के इस रूप की स्तुति की। इस स्वरूप का वर्णन भगवान ब्रह्मा ने भी किया था। मां का यह स्वरूप की श्रद्धालुओं को धन-धान्य, सुख-संपत्ति व समृद्धि का सूचक है। युवाचार्य स्वामी अनिरुद्धाचार्य जी ने मां कूष्मांडा को लाल गुलाब चढ़ाए और मालपुए का भोग लगाकर सभी भक्तो के लिए निरोगी रहने और कुशाग्र बुद्धि की मनोकामना की। स्वामी जी ने भक्तो को प्रसाद और आशीर्वाद दिया।


