फरीदाबाद। …या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। इसी भाव से चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन सूरजकुंड मार्ग स्थित श्रीलक्ष्मी नारायण दिव्यधाम-श्रीसिद्धदाता आश्रम के सत्संग भवन में चल रहे आदिशक्ति मां दुर्गा के नौ दिवसीय अनुष्ठान में देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने आदिशक्ति मां दुर्गा के द्वितीय स्वरुप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की। वेदवेदांग आचार्यो द्वारा किए गए देवी पुराण महाभागवत के मंत्रोच्चार के साथ युवाचार्य स्वामी अनिरुद्धाचार्य जी ने विश्व कल्याण की विशेष-पूजा-अर्चना की। आयोजित अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति के लिए मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की।
श्री सिद्धदाता आश्रम के अधिष्ठाता एवं श्रीरामानुज संप्रदाय की तीर्थ पीठ इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा के पीठाधीश्वर अनंतश्री विभूषित श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने विशेष पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को अपने प्रवचन में आदिशक्ति मां दुर्गा के द्वितीय स्वरुप मां ब्रह्मचारिणी की कथा में प्रस्तुत किया कि ब्रह्मचारिणी मां को ब्रह्मा की शक्ति और सृष्टि का सृजक बताया गया है। स्त्री को इसी कारण सृष्टि का कारक माना जाता है। जन्म, पालन और संहार इसी ब्रह्म तत्व का हिस्सा है। ज्ञान, वैराज्ञ और ध्यान की देवी मां ब्रह्मचारिणी को कहा जाता है। नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए देवी ने घोर तपस्या की। इसी घोर तपस्या के कारण मां को ब्रह्मचारिणी के स्वरूप में जानी गई। कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया।
देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने मां ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताते हुए सराहना की। मां की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है। इस दौरान दिव्यधाम में श्रद्धालुओं की लंबी कतार में लगे श्रद्धालुओं ने मां को चुनरी चढ़ाईऔर प्रसाद का भोग लगाया। श्रीसिद्धदाता आश्रम के अधिष्ठाता एवं श्रीरामानुज संप्रदाय की तीर्थ पीठ इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा के पीठाधीश्वर अनंतश्री विभूषित श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीपुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने भक्तों को प्रसाद और आशीर्वाद दिया।


