विचार से जुड़ी कुछ ताज़ा खबरें - अतुल्य लोकतंत्र समाचार

ज्ञानेन्द्र रावत अनुपम मिश्र स्मृति पुरुस्कार से सम्मानित होंगे

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं चर्चित पर्यावरणविद ज्ञानेन्द्र रावत देश के ख्यातनामा पुरुस्कार अनुपम मिश्र स्मृति पुरुस्कार से सम्मानित होंगे। इसकी…

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पर्यावरण विकास का आधार बनेगा तभी धरती बचेगी-ज्ञानेन्द्र रावत

आज पर्यावरण विनाश का सबसे बडा़ कारण वह तथाकथित विकास है जिसके पीछे इंसान आज अंधाधुंध भागे चला जा रहा…

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Mother’s Day मातृ दिवस | पृथ्वी पर परमात्मा का जागृत स्वरूप है मां

आज मातृ दिवस है। वैसे यथार्थ में मातृ दिवस को किसी दिवस विशेष में बांधा नहीं जा सकता। देखा जाये…

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उत्तराखंड के धधकते जंगलों की गाथा : ज्ञानेन्द्र रावत

आजकल उत्तराखंड के जंगल धधक रहे हैं। इससे तापमान में बढो़तरी तो होती ही है,पर्यावरण के साथ साथ मानव जीवन…

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विनाश की ओर बढ़ रही है धरती : ज्ञानेन्द्र रावत

आज धरती विनाश के कगार पर है। मानवीय स्वार्थ ने पृथ्वी, प्रकृति और पर्यावरण पर जो दुष्प्रभाव डाला है, उससे…

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परम्परागत कृषि पद्धति को बढ़ावा देने से बच सकते हैं प्राकृतिक संसाधन–रामभरोस मीणा

मानव द्वारा धान की पहचान, महत्व, उपयोगिता, उपभोग के महत्व को समझने के साथ ही कृषि का प्रारंभ हुआ। जंगलों…

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उ0 प्र0 विधान सभा चुनाव : भाजपा के लिए आसान होती सत्ता की राह –ज्ञानेन्द्र रावत

उत्तर प्रदेश के इस बार के विधान सभा चुनाव में जहां भाजपा राज्य की सत्ता में दोबारा वापिसी कहें या…

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चला गया शांति का मसीहा एस. एन. सुब्बाराव…

•अतुल्य लोकतंत्र के लिए वरिष्ठ पत्रकार एवं पर्यावरणविद् ज्ञानेंद्र सिंह रावत की कलम से.. शांति का मसीहा, राष्ट्रीय युवा योजना…

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उड़ गया सदा के लिए उड़न सिख मिल्खा सिंह–ज्ञानेन्द्र रावत

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो जीवन में ही व्यक्ति से विचार बन जाते हैं, महान बन जाते हैं और…

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मातृभूमि की रक्षा हेतु लक्ष्मीबाई का बलिदान अविस्मरणीय है : ज्ञानेन्द्र रावत

रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस 18 जून पर विशेष दरअसल 1857 का स्वाधीनता संग्राम जहां मातृभूमि की रक्षा का संग्राम…

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स्त्री शक्ति की प्रतिमूर्ति

सौंदर्य की प्रतिमूर्ति है मातृ रूप! एक दर्द ये भी जो किसी को नहीं दिखता वो स्त्री है सृजन करके…

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पर्यावरण संरक्षण , आज की जरूरत

अतुल्य लोकतंत्र के लिए युवा लेखक/स्तंभकार/साहित्यकार प्रफुल्ल सिंह "बेचैन कलम" की कलम से... तप रहा है बदन तो ढूंढ रहे…

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